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पश्चिम एशिया संकट पर जयशंकर ने संसद में संवाद और कूटनीति पर दिया जोर

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पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों और संभावित ऊर्जा संकट के मुद्दे पर राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने क्षेत्र की स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इसी बीच, भारत ने 20 फरवरी को बयान जारी कर अपनी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी।

वहीं, विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। साथ ही, संबंधित मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि समय पर उचित कदम उठाए जा सकें।

लोकसभा में एस. जयशंकर ने रखा सरकार का पक्ष
पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों और संभावित ऊर्जा संकट के मुद्दे पर राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने क्षेत्र की स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

इसी बीच, भारत ने 20 फरवरी को बयान जारी कर अपनी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। वहीं, विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। साथ ही, संबंधित मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि समय पर उचित कदम उठाए जा सकें।

लोकसभा में पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने सदन में हंगामा न करने को कहा। इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान में चल रहे संघर्ष पर जानकारी देना शुरू किया। हालांकि, विपक्षी सांसद ‘वी वॉन्ट डिस्कशन’ के नारे लगाते रहे।

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आईआरआईएस लावन पर जयशंकर ने दिया बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान से नेतृत्व स्तर पर संपर्क करना मुश्किल है। इसके बावजूद, ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का धन्यवाद किया। भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन (IRIS Lavan) को कोच्चि पोर्ट में डॉक करने की अनुमति दी।

यह अनुमति मानवीय आधार पर दी गई। भारत ने जहाज को तकनीकी सहायता भी प्रदान की। इसी दिन मुंबई के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने चेतावनी जारी की।भारतीय समुद्री कर्मियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। उन्हें दूतावास की सलाह मानने को भी कहा गया।भर्ती और शिपिंग कंपनियों के लिए भी निर्देश जारी किए गए। कंपनियों से कहा गया कि वे भारतीय कर्मियों को ईरान न भेजें।

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