मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है, जिसे ईरान और कतर साझा करते हैं। इस हमले को ईरान ने “आर्थिक युद्ध” करार दिया और इसके जवाब में खाड़ी देशों के कई ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए।
ईरान की जवाबी कार्रवाई में कतर को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र, जो LNG निर्यात का प्रमुख केंद्र है, मिसाइल हमले की चपेट में आ गया। कतरएनर्जी के अनुसार, गैस रिफाइनरियों को गंभीर क्षति पहुंची है और इन्हें पूरी तरह ठीक होने में कई साल लग सकते हैं, जिससे वैश्विक गैस आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
इन हमलों के दायरे में सऊदी अरब, यूएई और कुवैत भी आ गए। सऊदी के यनबू और जुबैल जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों, यूएई के गैस क्षेत्रों और कुवैत की रिफाइनरियों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया गया। कुवैत की मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला रिफाइनरियों में आग लग गई, जबकि यूएई के कुछ गैस ठिकानों पर हमलों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ।
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गैस ठिकानों पर हमलों से खाड़ी में तनाव, वैश्विक संकट का खतरा गहराया
इस संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है और यूरोप में यह 30% तक बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो गैस और तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है, क्योंकि वह अपनी LNG जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कतर पर निर्भर है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे देश में ईंधन की कीमतों और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
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