Asaduddin Owaisi की पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) को बिहार में बेहतर प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल चुनाव से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे। चुनाव से पहले ही Humayun Kabir की Aam Janata Unnayan Party (AJUP) के साथ गठबंधन टूट गया, जिसके बाद AIMIM ने 12 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। ये सभी सीटें मुस्लिम बहुल इलाकों में थीं, लेकिन पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी। ओवैसी ने मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, उत्तर 24 परगना, पश्चिम बर्धमान और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों की सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
Also Read: ममता बनर्जी के शासन पर संकट, पश्चिम बंगाल रुझानों में बीजेपी आगे
बंगाल में AIMIM का 0.19% वोट शेयर, पार्टी को झटका
हालांकि, अधिकांश जगहों पर पार्टी को बेहद कम वोट मिले। उदाहरण के तौर पर, मोथाबाड़ी में AIMIM को 995 वोट, सुजापुर में करीब 2500, सुती में 741 और रघुनाथगंज में लगभग 1400 वोट ही मिल सके। केवल कांडी सीट पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही, जहां उसे 11,000 से अधिक वोट मिले, लेकिन यह जीत में तब्दील नहीं हो सका। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार दोपहर तक AIMIM का कुल वोट शेयर सिर्फ 0.19 प्रतिशत के आसपास रहा, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका है। इस बीच मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में मतदाता सूची संशोधन को लेकर विवाद भी रहा, जिसे AIMIM ने चुनावी मुद्दा बनाया।
ओवैसी पर एंटी-बीजेपी वोटों को बांटने के आरोप भी लगे, हालांकि पार्टी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है। पार्टी को उम्मीद थी कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र में उसके प्रदर्शन का असर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, जिससे पार्टी की कमजोर पकड़ उजागर हुई। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले AJUP के साथ गठबंधन टूटना AIMIM के लिए बड़ा झटका साबित हुआ, जिसके बाद ओवैसी ने पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कोई खास सफलता हासिल नहीं की।
Also Read: RCB को IPL के बीच बड़ा झटका, स्टार खिलाड़ी अचानक लौटा घर


[…] Also Read : बंगाल में AIMIM की सियासत नहीं चली, ओव… […]