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    भारत

    भारत और पाकिस्तान ने विभाजन के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग-अलग कूटनीतिक पहचान स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए।भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति, विकासशील देशों के साथ सहयोग और संतुलित विदेश नीति को अपनी ताकत बनाया, जबकि पाकिस्तान ने कई मौकों पर क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक गठबंधनों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। साल 1975 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के चुनाव ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मुकाबले को नई पहचान दी। 1971 के बांग्लादेश युद्ध में ऐतिहासिक जीत और दक्षिण एशिया में बढ़ते प्रभाव के बावजूद भारत इस चुनाव में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका।

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    आठ दौर की वोटिंग के बाद भारत पीछे हटा, अब 50 साल बाद बदली कूटनीतिक तस्वीर

    एशियाई समूह की एक सीट के लिए भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे, जबकि जीत के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था। शुरुआती मतदान में भारत को 60 और पाकिस्तान को 59 वोट मिले, लेकिन लगातार कई दौर की वोटिंग के बाद भी किसी उम्मीदवार को आवश्यक समर्थन नहीं मिला। चुनावी गतिरोध समाप्त करने के लिए कुवैत, मिस्र, ईरान, अल्जीरिया, इराक, थाईलैंड और कई अन्य देशों ने भारत से सहमति बनाने की अपील की। अंततः भारत के स्थायी प्रतिनिधि जयपाल ने उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया, जिससे पाकिस्तान निर्विरोध चुना गया और उसे 123 वोट मिले।

    यह घटना भारतीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण सबक बन गई, क्योंकि उसने अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की चुनौतियों को उजागर किया। आज, लगभग 50 वर्ष बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। भारत 2028-29 के लिए UNSC की अस्थायी सदस्यता का अभियान आधिकारिक रूप से शुरू कर चुका है। बदलते वैश्विक परिदृश्य, बढ़ती आर्थिक ताकत, सक्रिय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत भूमिका के कारण भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली स्थिति में दिखाई देता है।

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    By aman