मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करते हुए कई महत्वपूर्ण कानूनी बदलावों का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और पारिवारिक अधिकारों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने इस प्रस्ताव को ऐतिहासिक पहल बताया है। हालांकि, विपक्ष ने विधेयक पेश करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को रिकॉर्ड पर शामिल कर लिया। अब इस प्रस्तावित कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाएगी और नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करेगी।
विधानसभा में पेश हुआ मध्य प्रदेश UCC बिल, विवाह और तलाक से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव प्रस्तावित
प्रस्तावित यूसीसी मसौदे के अनुसार अनुसूचित जनजातियों, संरक्षित पारंपरिक समुदायों तथा घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। मसौदे में सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक वैध विवाह का प्रावधान किया गया है। पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष निर्धारित की गई है। मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायतों के फैसलों को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। निकाह हलाला को बढ़ावा देने या आयोजित करने को दंडनीय अपराध बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा विवाह और तलाक दोनों का अनिवार्य पंजीकरण आवश्यक होगा ताकि सभी पारिवारिक प्रक्रियाएं कानूनी रूप से दर्ज और सुरक्षित रह सकें।
यूसीसी मसौदे में सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा देने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे सभी बच्चों को समान अधिकार दिए जाएंगे। इसके साथ ही बेटा और बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में बराबर उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। माता और पिता दोनों को भी प्रथम श्रेणी का उत्तराधिकारी माना जाएगा। मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति अपना उत्तराधिकार अधिकार खो देगा। यदि किसी व्यक्ति का कोई वैध उत्तराधिकारी नहीं होगा, तो उसकी संपत्ति राज्य के अधिकार में चली जाएगी।
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लिव-इन संबंधों, पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के लिए नए कानूनी प्रावधान शामिल
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी मसौदे में विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं। साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के समक्ष अपने संबंध का पंजीकरण कराना होगा। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक होगी और दोनों पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए। निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं कराने, गलत जानकारी देने या नोटिस के बावजूद सूचना नहीं देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यदि कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध में पाया जाता है, तो उसके लिए पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। महिला साथी को छोड़ने की स्थिति में भरण-पोषण का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
विधेयक पेश होने के बाद विधानसभा में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस विधायकों ने प्रक्रिया और प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सदन में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे, जबकि विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सरकार ने विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक प्रदेश में समान अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की नजरें विधानसभा की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।


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