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    CJI

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को छात्रों का एनरोलमेंट नहीं करने को कहा था। हालांकि, BCI ने कुछ घंटों बाद अपना आदेश वापस ले लिया। अब CJI सूर्यकांत ने छात्रों से जल्द लाइसेंस लेने और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल होने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी BCI से उसके फैसले पर जवाब मांगा है। अदालत ने NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई से बचने का निर्देश दिया है।

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    BCI ने NALSAR छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाई

    NALSAR के करीब 450 छात्रों ने 2026 दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया था। शुरुआत में करीब 70 छात्रों ने विश्वविद्यालय के वीसी और प्रशासन को पत्र भेजा था। छात्रों ने पत्र में संवैधानिक जवाबदेही और अकादमिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंताएं बताई थीं। इसके बाद कई अन्य बैचों के छात्रों ने भी विरोध में अपना समर्थन दिया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा कि वे पीछे हट जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह बिल्कुल अनावश्यक था। मैं खुद भी एक छात्र रहा हूं और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रहा हूं। यह मेरे और छात्रों के बीच बातचीत का मामला है। इसमें दखल देने वाले वे (BCI) कौन होते हैं?”

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    CJI: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर लगाई रोक

    छात्रों के विरोध के बाद BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों को एनरोलमेंट रोकने का निर्देश जारी किया था। इस फैसले से छात्रों के कानूनी करियर को लेकर चिंता बढ़ गई थी। BCI ने हालांकि कुछ घंटों के भीतर अपना निर्देश वापस लेकर छात्रों को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने BCI के कदम की आलोचना की थी। उन्होंने इस कार्रवाई को मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कठोर बताया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान BCI से उसके सर्कुलर पर जवाब मांगा। अदालत ने NALSAR के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। CJI सूर्यकांत ने भी छात्रों के पेशेवर भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने छात्रों से जल्द लाइसेंस लेने और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल होने की अपील की। अदालत के इस रुख से छात्रों को अपने कानूनी करियर को आगे बढ़ाने में राहत मिली है।

    NALSAR विवाद ने अकादमिक स्वतंत्रता, छात्रों के अधिकार और पेशेवर एनरोलमेंट को लेकर बहस तेज कर दी है। छात्रों ने अपने विरोध के जरिए विश्वविद्यालय के फैसले पर सवाल उठाए थे। BCI की शुरुआती कार्रवाई ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से छात्रों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का खतरा टल गया है। अदालत आगे BCI के फैसले और संबंधित पक्षों के जवाबों पर विचार करेगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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