मध्य प्रदेश के कैमोर कस्बे में दशकों पहले शुरू हुई एस्बेस्टस फैक्ट्री का असर आज भी स्थानीय लोगों की जिंदगी पर बना हुआ है। ब्रिटिश मीडिया की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की कंपनी टर्नर एंड न्यूअल से जुड़ा करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरा अब भी कैमोर और उसके आसपास मौजूद है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी, धूल और टूटे अवशेष खुले इलाकों, रिहायशी बस्तियों और खेल के मैदानों तक में फैले हैं। विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है, क्योंकि एस्बेस्टस के महीन रेशे हवा में फैलकर लोगों के फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से एस्बेस्टोसिस जैसी बीमारी के साथ फेफड़ों के कैंसर समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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1970 के दशक की चेतावनी के बावजूद नहीं हटा एस्बेस्टस कचरा
ब्रिटिश समाचार चैनल ITV News की जांच ने कैमोर में मौजूद एस्बेस्टस प्रदूषण को फिर चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कभी ब्रिटेन की प्रमुख औद्योगिक कंपनियों में शामिल रही टर्नर एंड न्यूअल की गतिविधियों से जुड़ा भारी मात्रा में कचरा फैक्ट्री बंद होने के वर्षों बाद भी इलाके में मौजूद है। जांच के दौरान रिपोर्टर ने कई स्थानों पर एस्बेस्टस के टूटे हुए टुकड़े और इससे प्रभावित मिट्टी देखी। रिपोर्ट में कहा गया कि ये टुकड़े सामान्य पत्थरों जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनके भीतर मौजूद खतरनाक रेशे टूटने या धूल बनने पर हवा में फैल सकते हैं। रिपोर्टर ने इलाके में जांच के दौरान विशेष श्वसन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि यदि ऐसी स्थिति ब्रिटेन में सामने आती, तो अधिकारी इसे गंभीर पर्यावरणीय जोखिम के तौर पर लेते।
एस्बेस्टस प्रदूषण का असर स्थानीय स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने का दावा किया गया है। पीटीआई के अनुसार, कैमोर में लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर मुरलीधर वेंकटेश्वरन ने एस्बेस्टोसिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, ऐसे मरीजों को लंबे समय तक सांस लेने में परेशानी, लगातार इलाज और महंगे चिकित्सा खर्च का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में फेफड़ों का कैंसर भी सामने आ सकता है। रिपोर्ट में ऐसे परिवारों का भी उल्लेख किया गया है जो अपने स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को एस्बेस्टस के संपर्क से जोड़ते हैं। इनमें सोमेश का मामला शामिल है, जिन्हें बचपन में स्कूल के खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क के बाद कैंसर का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार, बीमारी उनके शरीर में काफी फैल चुकी है।
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पुराने दस्तावेजों में खतरे की चेतावनी, फिर भी स्थानीय लोगों की सेहत पर संकट कायम
जांच के दौरान सामने आए पुराने दस्तावेजों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 के दशक में कंपनी से जुड़े एक डॉक्टर ने प्रबंधन को भारतीय कर्मचारियों को एस्बेस्टस के खतरों से बचाने के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था करने की सलाह दी थी। दस्तावेजों में कर्मचारियों को एस्बेस्टस के जोखिमों के बारे में जानकारी देने और पर्याप्त सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत बताई गई थी। इसके बावजूद आज कैमोर में बड़ी मात्रा में एस्बेस्टस कचरा मौजूद होने का दावा सामने आया है। टर्नर एंड न्यूअल को ब्रिटेन और अमेरिका में एस्बेस्टस से जुड़े मुकदमों का सामना करना पड़ा और वर्ष 2001 में कंपनी का पतन हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था हुई, लेकिन कैमोर में जमा कचरे को हटाने के लिए कोई विशेष फंड या व्यापक योजना सामने नहीं आई।
अब कैमोर में एस्बेस्टस कचरे के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने रिपोर्ट में सामने आए दावों को चिंताजनक बताया और एस्बेस्टस के कारण अपने परिजनों को खोने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई। प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन की कंपनियों को अपने कारोबार और सप्लाई चेन में मानवाधिकारों तथा पर्यावरणीय मानकों का सम्मान करना चाहिए। सरकार ने जिम्मेदार कारोबारी आचरण से जुड़े अपने दृष्टिकोण की समीक्षा में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार करने की बात भी कही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कैमोर में मौजूद एस्बेस्टस कचरे का सुरक्षित तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
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