गुजरात सरकार ने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। ये नियम कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों पर लागू होंगे। सरकार ने स्कूलों को वेलनेस टीम बनाने और काउंसलर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ट्रेनिंग भी लेनी होगी। सरकार का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई और परीक्षा के दबाव से बचाना और उन्हें बेहतर माहौल देना है।
Also Read : बेंगलुरु होटल के स्विमिंग पूल में करंट से 2 विदेशी नागरिकों की मौत, 2 घायल
गुजरात के स्कूलों में बनेगी वेलनेस टीम, काउंसलर रखना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर स्कूल को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में एक वेलनेस टीम बनानी होगी। इस टीम में प्रिंसिपल, शिक्षक, काउंसलर, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का सदस्य और दो विद्यार्थी शामिल होंगे। टीम बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर नजर रखेगी। अगर कोई बच्चा लगातार उदास रहता है, अकेला रहता है या पढ़ाई को लेकर तनाव महसूस करता है, तो टीम उसकी मदद करेगी। 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों को कम से कम एक योग्य काउंसलर रखना अनिवार्य होगा।
सरकार ने मनो-मित्र (Mano-Mitra) पहल भी शुरू की है, जिसके तहत हर स्कूल की वेलनेस टीम में दो विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। ये विद्यार्थी अपने साथियों की समस्याएं सुनेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें काउंसलर तक पहुंचाएंगे। स्कूल बोर्ड परीक्षाओं और रिजल्ट के समय विद्यार्थियों को अतिरिक्त काउंसलिंग भी देंगे। कक्षा 8 से 9 और कक्षा 10 से 11 में प्रवेश के दौरान भी बच्चों को विशेष मार्गदर्शन मिलेगा। 100 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूल बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की मदद ले सकेंगे।
Also Read : सोनिया गांधी ने लालू यादव से की मुलाकात, स्वास्थ्य का जाना हाल; पुरानी यादें हुईं ताजा
कम नंबर आने पर बच्चों को नहीं करेंगे शर्मिंदा
गुजरात सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को अलग समूह में नहीं बैठा सकते। शिक्षक पूरी कक्षा के सामने किसी बच्चे को डांट नहीं सकेंगे और न ही उसके नंबरों का मजाक उड़ा सकेंगे। स्कूल बच्चों के तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान, खेल, संगीत, नृत्य और पेंटिंग जैसी गतिविधियां भी आयोजित करेंगे। इसके अलावा, सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को साल में कम से कम दो बार मानसिक स्वास्थ्य की ट्रेनिंग मिलेगी। स्कूल बच्चों की शिकायतों और सुझावों के लिए विशेष बॉक्स तथा हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराएंगे।
नए नियम बच्चों की निजी जानकारी और काउंसलिंग रिकॉर्ड की गोपनीयता भी सुनिश्चित करते हैं। स्कूल किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा नहीं कर सकेंगे। सरकार ने बुलिंग, साइबर बुलिंग, रैगिंग, मारपीट, यौन उत्पीड़न और भेदभाव जैसी घटनाओं पर भी सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति स्कूलों में इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी। साथ ही, स्कूल विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, कौशल विकास और करियर के विकल्पों के बारे में भी मार्गदर्शन देंगे।
Also Read : बेंगलुरु होटल के स्विमिंग पूल में करंट से 2 विदेशी नागरिकों की मौत, 2 घायल

[…] […]
[…] […]