राजपाल यादव जेल मामला इन दिनों सुर्खियों में है। चेक बाउंस केस में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिनेता ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद वह 5 फरवरी को तिहाड़ पहुंचे।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि पेशे या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े होने के आधार पर किसी को विशेष राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी माना कि बार-बार दिए गए आश्वासन के बावजूद बकाया राशि तय समय सीमा में जमा नहीं की गई।
राजपाल यादव जेल मामला और फिल्म इंडस्ट्री का समर्थन
राजपाल यादव जेल मामला सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से समर्थन की आवाजें उठीं। अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राजपाल यादव एक प्रतिभाशाली कलाकार हैं, जिन्होंने वर्षों तक दर्शकों को हंसाया है। उन्होंने घोषणा की कि वह अपनी आने वाली फिल्म में राजपाल यादव को साइन करेंगे और एक साइनिंग अमाउंट देंगे। सोनू सूद ने इसे दान नहीं बल्कि सम्मान बताया।
वहीं जन शक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव ने भी आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कठिन समय में मानवीय आधार पर सहयोग जरूरी है। तेज प्रताप यादव ने 11 लाख रुपये की मदद देने की बात कही।
अभिनेता गुरमीत चौधरी ने भी फिल्म बिरादरी से अपील की कि वह एक वरिष्ठ कलाकार के साथ खड़ी हो।
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क्या है राजपाल यादव जेल मामला?
राजपाल यादव जेल मामला वर्ष 2010 की फिल्म ‘अता-पता-लापता’ से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार एक कंपनी ने फिल्म निर्माण के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये दिए थे। फिल्म के असफल होने के बाद भुगतान विवाद खड़ा हुआ। कंपनी को दिए गए कुछ चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत मामला दर्ज हुआ।
2018 में निचली अदालत ने छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में उच्च अदालत से राहत मिली, लेकिन भुगतान समय पर न होने के कारण फिर से आत्मसमर्पण का आदेश दिया गया। राजपाल यादव ने पहले कहा है कि दी गई राशि निवेश थी और उन्होंने किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की। फिलहाल, मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आगे की सुनवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
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