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    बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: क्यों ऐतिहासिक माना जा रहा है यह चुनाव

    बिहार राज्यसभा

    बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 इस बार कई वजहों से खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है। 16 मार्च को होने वाले इस चुनाव के जरिए लंबे समय तक बिहार की राजनीति में प्रभाव रखने वाले Nitish Kumar की मुख्यमंत्री पारी का अंत माना जा रहा है। करीब 20 साल तक राज्य की सत्ता संभालने के बाद वे अब राज्यसभा के माध्यम से राष्ट्रीय राजनीति में जाने की तैयारी में हैं। इस चुनाव की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें तीन अलग-अलग दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष मैदान में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin भी बिहार से राज्यसभा जा रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख Upendra Kushwaha भी उम्मीदवार हैं। इन वजहों से बिहार का यह राज्यसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।

    बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में तीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मैदान में

    इस चुनाव को हाई प्रोफाइल बनाने वाली सबसे बड़ी वजह यह है कि तीन राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यसभा की दौड़ में शामिल हैं। जदयू के अध्यक्ष Nitish Kumar, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख Upendra Kushwaha इस चुनाव में प्रमुख चेहरे हैं।

    तीनों नेताओं का उच्च सदन में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। देश की सबसे बड़ी पार्टी Bharatiya Janata Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बिहार से राज्यसभा जाना इस चुनाव के महत्व को और बढ़ा देता है। इससे यह चुनाव केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

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    बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में 12 साल बाद होगा मतदान

    बिहार में राज्यसभा चुनाव अक्सर सर्वसम्मति से हो जाते थे और मतदान की नौबत कम ही आती थी। लेकिन बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में करीब 12 साल बाद वोटिंग की स्थिति बनी है, जिससे यह चुनाव और दिलचस्प हो गया है। इस बार बिहार से कुल पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें Rashtriya Janata Dal की, दो Janata Dal (United) की और एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की रही है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के कारण सभी दल अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।

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    बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में क्रॉस वोटिंग का खतरा

    इस बार के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका भी काफी चर्चा में है। सत्तारूढ़ National Democratic Alliance अपने पांचवें उम्मीदवार को जिताने की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्षी Mahagathbandhan कम से कम एक सीट बचाने के लिए रणनीति बना रहा है। क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए विपक्षी दलों ने अपने विधायकों को पटना के एक होटल में ठहराने का फैसला किया है, ताकि किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग से बचा जा सके। बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों को होटल में रखना एक असामान्य कदम माना जा रहा है।

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