BJP ने भवानीपुर सीट की जिम्मेदारी राजस्थान के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ को सौंपी थी। उनके नेतृत्व में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इलाके में लगातार प्रचार अभियान चलाया। टीम ने बूथ स्तर पर मतदाताओं से संपर्क किया और घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं। BJP नेताओं ने व्यापारिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी ने महिलाओं और युवा मतदाताओं के बीच अलग-अलग बैठकें आयोजित कीं। प्रचार के दौरान BJP कार्यकर्ताओं ने हिंदी भाषी समाज को एकजुट करने पर खास फोकस रखा। इसका असर मतदान के दौरान साफ दिखाई दिया और BJP को बड़ा राजनीतिक फायदा मिला। राजस्थान से पहुंचे नेताओं ने इलाके में मजबूत संगठन तैयार किया और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारा। उन्होंने व्यापारियों और स्थानीय परिवारों के बीच लगातार संवाद बनाए रखा।
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हिंदी भाषी वोटरों ने बढ़ाई BJP की ताकत
कोलकाता, हावड़ा, बैरकपुर ,आसनसोल जैसे इलाकों में हिंदी भाषी वोटरों ने इस बार खुलकर BJP का समर्थन किया। मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी और भोजपुरी समाज ने कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाई। BJP ने इन क्षेत्रों में रोजगार, उद्योग और व्यापार से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाया। पार्टी ने कारोबारी समुदाय के बीच लगातार संपर्क अभियान चलाए। इससे व्यापारिक वर्ग BJP के करीब आया और चुनाव में खुलकर समर्थन करता दिखाई दिया। कई सीटों पर हिंदी भाषी वोटरों की एकजुटता ने सीधे चुनावी नतीजों को प्रभावित किया।
राजनीतिक जानकार इसे BJP की सबसे बड़ी रणनीतिक सफलता मान रहे हैं। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस बंगाली अस्मिता और स्थानीय राजनीति के मुद्दों पर फोकस करती रही। हालांकि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में यह रणनीति ज्यादा असर नहीं दिखा सकी। BJP ने प्रवासी समुदाय को भरोसा दिलाया कि पार्टी व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देगी। इसी वजह से हिंदी भाषी समाज का बड़ा हिस्सा BJP के साथ खड़ा नजर आया। चुनाव के दौरान कारोबारी वर्ग ने भी खुलकर पार्टी का समर्थन किया। इससे कई सीटों पर BJP की स्थिति मजबूत हुई और पार्टी को अप्रत्याशित बढ़त मिली। अब यह वर्ग बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी फैक्टर बन चुका है।
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उत्तर बंगाल में भी दिखा असर
उत्तर बंगाल में BJP ने इस बार बेहद आक्रामक रणनीति अपनाई और केंद्रीय नेताओं को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी। गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई नेताओं ने कूचबिहार, दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में लगातार प्रचार किया। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया और कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय रखा। BJP नेताओं ने रोजगार, उद्योग और व्यापार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने प्रवासी समुदाय के बीच भी लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया। इसका असर मतदान के दौरान दिखाई दिया और BJP को कई महत्वपूर्ण सीटों पर बड़ी सफलता मिली। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे पार्टी की सुनियोजित रणनीति का परिणाम मान रहे हैं।
BJP ने इस चुनाव में कई प्रवासी राजस्थानी चेहरों को भी टिकट दिया । पार्टी ने इन चेहरों के जरिए हिंदी भाषी वोटरों के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश की। उनमें से कई उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल रहे। चुनाव प्रचार के दौरान संगठन ने स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ व्यापारिक हितों को भी प्रमुखता दी। इससे शहरी क्षेत्रों में BJP की पकड़ मजबूत हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में भी यह रणनीति असर दिखा सकती है। बंगाल की राजनीति में अब प्रवासी और हिंदी भाषी वोटर स्थायी ताकत बनते दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल अब इस वर्ग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
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