गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का जोरदार दबाव रहा, जिससे सेंसेक्स एक्सपायरी के दिन बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार कमजोरी के साथ नजर आया और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद अंत में लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान, एक ही सत्र में निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹3 लाख करोड़ की गिरावट आई, जिससे बाजार में चिंता और सतर्कता का माहौल बना। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस गिरावट का प्रमुख कारण निवेशकों की असमंजस स्थिति और वैश्विक संकेतों का नकारात्मक प्रभाव रहा।
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गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव रहा, जिससे बीएसई सेंसेक्स 503.76 अंक गिरकर 83,313.93 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 133.20 अंक लुढ़ककर 25,642.80 पर आ गया। हालांकि मिडकैप इंडेक्स दिन के निचले स्तर से थोड़ा संभला, लेकिन समग्र बाजार की धारणा कमजोर बनी रही। वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर साफ देखा गया, जहां एशियाई बाजारों में भारी गिरावट आई, जैसे दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4 फीसदी गिरा और जापान का निक्केई लगभग 1 फीसदी नीचे आया। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 1.5 फीसदी फिसला था। वैश्विक स्तर पर टेक शेयरों में बिकवाली की वजह एआई सेक्टर में बढ़ती लागत और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता को बताया जा रहा है, जिससे निवेशक मुनाफावसूली की ओर बढ़ रहे हैं।
बाजार में गिरावट की वजह: Q3 नतीजे रुपये की कमजोरी और RBI पॉलिसी
तीसरी तिमाही के नतीजों ने बाजार की उम्मीदों को पूरा नहीं किया, क्योंकि कई कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। बजट और भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौतों से जुड़ी उम्मीदें पहले ही कीमतों में समाहित हो चुकी थीं, और अब फोकस कमाई और वैल्यूएशन पर लौट आया है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस बीच, आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशक सतर्क हैं, जबकि ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम होने के बावजूद ग्रोथ, महंगाई और लिक्विडिटी पर केंद्रीय बैंक के संकेतों पर ध्यान दिया जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे एफआईआई की खरीदारी में ब्रेक लगते दिखे।
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