गौतम गंभीर ने टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने की आलोचना की।
इस बयान के बाद चैंपियन टीम के कोच गौतम गंभीर, खिलाड़ी ईशान किशन और कई पूर्व खिलाड़ियों तथा राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
1983 की विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे कीर्ति आज़ाद द्वारा कहा गया कि विजेता टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी खिलाड़ी थे, लेकिन ट्रॉफी को मंदिर ले जाया गया। उनके अनुसार, इस पर भारतीय टीम को शर्म आनी चाहिए।
रविवार को भारत द्वारा टी-20 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को 96 रन से हराया गया था। जीत के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह अहमदाबाद के एक हनुमान मंदिर पहुँचे थे। इसी घटना को लेकर कीर्ति आज़ाद द्वारा यह टिप्पणी की गई थी।
Also read:https://www.orderofindia.com/breaking-news/iran-missile-attacks-drop-amid-war-strategy-shift/
गौतम गंभीर ने ट्रॉफी विवाद पर दी प्रतिक्रिया
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कीर्ति आज़ाद के बयान पर निराशा जताई। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि ऐसे सवालों का जवाब देना बेकार है, क्योंकि वर्ल्ड कप जीतना पूरे देश के लिए गर्व और जश्न का बड़ा पल है।
गंभीर के मुताबिक लोगों को टीम की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान खिलाड़ियों की उपलब्धियों को कमज़ोर करते हैं। अगर हर बयान को गंभीरता से लिया जाएगा, तो इससे खिलाड़ियों की मेहनत और सफलता का महत्व कम हो जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के बाद टीम पर काफी दबाव था, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और चैंपियन बने। गंभीर ने कहा कि ऐसे बयान टीम की सफलता को कमतर दिखाते हैं।
गंभीर के अनुसार खिलाड़ियों ने जीत हासिल करने के लिए काफी मुश्किलों और दबाव का सामना किया। इसलिए इस तरह की टिप्पणियाँ अपने ही खिलाड़ियों और टीम को नीचा दिखाने जैसी हैं, जो नहीं किया जाना चाहिए।
Also read:https://centraltimes.in/world/trump-iran-war-update-end-soon/

