ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। IRGC के अनुसार, जॉर्डन में तैनात अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। वहीं कुवैत में MQ-9 रीपर ड्रोन ऑपरेशन बेस पर भी हमला करने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान के शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हवाई हमला किया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में दो लोगों की मौत हुई।
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ईरान के जवाबी हमलों से मिडिल-ईस्ट में तनाव और बढ़ गया
ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में किसी जहाज पर हमला करता है तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजलीघरों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा। यमन के हूती विद्रोहियों ने भी शिपिंग कंपनियों को सऊदी अरब के बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी दी है। वहीं अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, युद्ध का खर्च 37.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और तेल की कीमतों में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में हालात पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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