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    धूम्रापन नहीं, वायु प्रदूषण भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ा रहा है

    health

    नवीनतम अध्ययन (Nature, 2 जुलाई 2025) के अनुसार, जिन लोगों ने कभी सिगरेट नहीं पी, उनके फेफड़ों में कैंसर-संचालित DNA म्यूटेशन्स पाए जा रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदूषित वातावरण में रहने वाले व्यक्तियों के ट्यूमर में ये म्यूटेशन्स विशेष रूप से अधिक संख्या में देखे गए हैं। यहाँ म्यूटेशन से तात्पर्य डीएनए अनुक्रम में स्थायी परिवर्तन से है, जो कोशिका के अंदर जीन की संरचना बदलकर प्रोटीन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी ला सकते हैं।

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    प्रदूषण और DNA म्यूटेशन्स: नॉन‑स्मोकर फेफड़ों में नई चेतावनी

    यह अंतरराष्ट्रीय अध्ययन, जिसे University of California San Diego और National Cancer Institute (NCI) ने Nature (2 जुलाई 2025) में प्रकाशित किया, दर्शाता है कि जिन लोगों ने कभी सिगरेट नहीं पी, उनके फेफड़ों में cancer‑driving DNA म्यूटेशन्स पाए गए हैं—और यह विशेष रूप से प्रदूषण के उच्च स्तर वाले क्षेत्रों में रहने वाले नॉन‑स्मोकर व्यक्तियों में अधिक मात्रा में हैं

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    परंपरागत औषधियों और फेफड़ों के कैंसर‑सक्षम डीएनए बदलाव

    नवीनतम अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह सामने आया है कि ताइवान में पारंपरिक चीनी औषधियों में प्रयुक्त अरिस्टोलोचिक एसिड (aristolochic acid) फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी विशिष्ट डीएनए म्यूटेशन (mutational signature SBS22a) उत्पन्न कर सकता है जो विशेष रूप से नॉन‑स्मोकर रोगियों के ट्यूमर में ही देखी गई। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन औषधियों का धुआँ या इसके मेटाबोलाइट्स साँस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुँचते हैं और डीएनए में स्थायी adducts का निर्माण करते हैं, जिससे जीन की संरचना प्रभावित होती है और कैंसर‑प्रवर्तक DNA म्यूटेशन्स विकसित हो सकती हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होता है

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