देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के लिए समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस महीने 5000 से अधिक उड़ानें रद्द होने के बाद अब एयरलाइन पर एक नई मुसीबत के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब Competition Commission of India (CCI) इंडिगो पर एंटीट्रस्ट जांच करने पर विचार कर रही है। यह जांच यह तय करने के लिए की जाएगी कि क्या इंडिगो ने अपने बाजार में वर्चस्व का गलत उपयोग किया है। इस जांच का उद्देश्य यह देखना है कि क्या इंडिगो ने अनुचित शर्तें यात्रियों पर थोपने की कोशिश की। इसके अलावा, क्या एयरलाइन ने सेवाओं में बाधा डाली और ग्राहकों को असुविधा का सामना कराया।
5000 से ज्यादा उड़ानें रद्द, अब इंडिगो को CCI से मिल सकती है एंटीट्रस्ट जांच
CCI इस मामले को बारीकी से देख रही है और जल्द ही फैसला करेगी कि क्या जांच शुरू की जाए या नहीं। वहीं, भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस संकट की जांच कर रहा है और रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इंडिगो के पास देश के घरेलू एयरलाइन मार्केट का लगभग 65% हिस्सा है, जिससे यह प्रमुख एयरलाइन बनती है। हालांकि, पायलटों के लिए लागू नए आराम नियमों को ठीक से लागू नहीं करने से भारी क्रू शॉर्टेज का सामना करना पड़ा। इसके कारण, दिसंबर के पहले हफ्ते में 5000 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। एयरलाइन को कुल 2422 कैप्टन की आवश्यकता थी, लेकिन उसके पास केवल 2357 थे, जिससे बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द हो गईं।
DGCA ने इंडिगो के सीईओ Pieter Elbers और COO Isidre Porqueras को शो-कॉज नोटिस भेजा था। यह नोटिस 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए था, लेकिन एयरलाइन ने समय मांगा। इंडिगो ने अपनी स्थिति को जटिल बताते हुए DGCA से 15 दिनों का समय मांगा, जो नियमों के तहत स्वीकार्य है। DGCA द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब देने के लिए एयरलाइन ने विस्तार से समय मांगा है। इंडिगो पहले भी एंटीट्रस्ट जांच के दायरे में आ चुका है। 2015 और 2016 में दो मामले दर्ज हुए थे, जिनमें एक शिकायत यात्रियों पर अनुचित शर्तें लगाने को लेकर थी। दूसरा मामला एयर इंडिया की तरफ से था, जिसमें भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की गई थी। हालांकि, CCI ने इन दोनों मामलों को खारिज कर दिया था, लेकिन अब एयरलाइन फिर से जांच के घेरे में है।
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