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    बढ़ते

    खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण इस सप्ताह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक वर्ष के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचीं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों पर भी तेजी से देखने को मिला। दरअसल, American Automobile Association के अनुसार पेट्रोल की औसत कीमत रातों-रात 11 सेंट बढ़ गई। अब अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 3.11 डॉलर तक पहुंच गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी पहले से चल रही मौसमी ईंधन तैयारी प्रक्रिया के बीच और तेज हो गई। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध ने कीमतों में बढ़ोतरी को और तेज कर दिया।

    इसके अलावा मध्य पूर्व में सैन्य टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ती जा रही है। दरअसल जवाबी कार्रवाई में Iran ने क्षेत्र में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इसी क्रम में Saudi Arabia में स्थित अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला भी किया गया। इसके बाद तेल बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका से निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
    नतीजतन अमेरिका के प्रमुख कच्चे तेल का भाव 8.6 प्रतिशत बढ़कर 77.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा। इसी तरह Brent Crude Oil की कीमत भी 6.7 प्रतिशत बढ़कर 81.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इस प्रकार वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में तेजी का सिलसिला लगातार जारी रहा।

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    बढ़ते संघर्ष से ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल

    वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से Strait of Hormuz के बंद होने की संभावना ने ऊर्जा बाजार को चिंतित किया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां यातायात बाधित होता है तो कई देशों को तेल आपूर्ति में भारी मुश्किलें हो सकती हैं। इसी कारण सप्ताह की शुरुआत में वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने पर कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसलिए कई देश पहले से ही वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने में जुट गए हैं।

    हालांकि इस स्थिति के बावजूद India के लिए फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन भंडार मौजूद है। इसके अलावा सरकार संभावित संकट से निपटने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा आयात विकल्प तलाश रही है। विशेष रूप से एलपीजी और एलएनजी के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान पर तेजी से काम हो रहा है। उधर Qatar ने हालिया ड्रोन हमलों के बाद एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस निर्णय से वैश्विक गैस आपूर्ति और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है। फिलहाल सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है।

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    One thought on “तनाव बढ़ते ही अमेरिका में पेट्रोल कीमतों में उछाल”

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