आजम खान को जेल से लेने उनके बेटे 25 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे। नो पार्किंग जोन में खड़ी गाड़ियों पर पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई करना शुरू कर दिया। इन सभी 25 वाहनों पर नियम उल्लंघन के तहत ट्रैफिक चालान काटा गया है।
पुलिस ने कुल 73,500 रुपये का जुर्माना इन गाड़ियों पर लगाया है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर फरीद अहमद ने चालान की पुष्टि करते हुए नियमों का हवाला दिया। आजम खान समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में शामिल माने जाते रहे हैं। जब प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी, तब आजम काफी प्रभावशाली थे। अखिलेश यादव के नेतृत्व में आजम को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है।
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आजम खान: नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियों पर पुलिस का बड़ा एक्शन
बीजेपी की सरकार आने के बाद आजम खान पर मुकदमों की संख्या बढ़ती चली गई। लगातार कानूनी मामलों के कारण आजम को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। आजम खान ने कई बार न्यायालय में जमानत के लिए याचिकाएं दायर कीं।
काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें तुरंत राहत नहीं मिल पाई और मामला लटकता गया। अब जाकर उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे उम्मीद जगी है। आजम खान की रिहाई के बाद राजनीतिक हलकों में कई कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आजम सपा छोड़कर बसपा में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में बसपा का बड़ा सम्मेलन है। माना जा रहा है कि उसी दिन आजम खान बसपा का दामन थाम सकते हैं।
समर्थकों में नाराजगी है कि अखिलेश ने आजम के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। सपा नेताओं की चुप्पी ने आजम के राजनीतिक भविष्य को और अस्थिर किया।आजम खान के लिए राजनीति में वापसी की राह आसान नहीं रहने वाली है। उनकी पार्टी के साथ दूरी और कानूनी चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। समर्थक आज भी आजम को एक मजबूत नेता के तौर पर देखना चाहते हैं। बसपा में शामिल होने की स्थिति में उनका राजनीतिक प्रभाव बदल सकता है।भविष्य की राजनीति में आजम की भूमिका अहम लेकिन अनिश्चित बनी हुई है।
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