दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर को सशर्त जमानत दी थी। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सामाजिक नाराजगी देखने को मिली। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर सेंगर को जेल में रखा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर कानून के महत्वपूर्ण सवालों पर विचार करने का निर्देश दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अपराध की गंभीरता और पीड़िता सुरक्षा सर्वोपरि है। सेंगर की जमानत फिलहाल रोकने का फैसला न्याय और समाज के हित में किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिन के भीतर सभी पक्षों से जवाब मांगा और सुनवाई तय की। इस निर्णय से न्यायपालिका ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगाई
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह नाबालिग पीड़िता के साथ हुआ भयानक अपराध है। सुप्रीम कोर्ट में CBI ने कड़ा रुख अपनाकर जमानत रद्द करने की दलील दी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जमानत देना अपराध की गंभीरता के खिलाफ संदेश देगा। CBI ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी समाज में गलत संकेत और असुरक्षा पैदा करेगी। अदालत ने नोटिस जारी कर 14 दिन के भीतर सभी पक्षों से जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता के अधिकार और समाज का भरोसा सुरक्षित रहेगा। CBI की दलीलों ने अदालत को जमानत रोकने और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता दिखा दी। पीठ ने कहा कि कानून और सामाजिक दृष्टिकोण दोनों का ध्यान रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर अपराध में जमानत देने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले पीड़िता दिल्ली में CBI कार्यालय पहुंची और याचिका दायर की। उसने जमानत के खिलाफ आवेदन देकर न्याय की मांग और अपराधी को जेल में रखने की अपील की। 23 दिसंबर को हाई कोर्ट ने सेंगर को सशर्त जमानत दी थी, जिसके बाद विरोध शुरू हुआ। पीड़िता, उसकी मां और एक्टिविस्ट योगिता भयाना लगातार धरना देकर न्याय की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर सेंगर की जमानत रद्द करने की मांग कर रहे। फैंस और समाज के लोग न्याय प्रक्रिया और पीड़िता सुरक्षा पर लगातार ध्यान दे रहे हैं। विरोध प्रदर्शन ने मीडिया और अदालत दोनों में मामले की गंभीरता उजागर की। इसने प्रशासन ,न्यायपालिका पर दबाव बढ़ाया कि संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करें। यह घटना समाज और न्याय प्रणाली के लिए संदेश देने वाला गंभीर उदाहरण बन गई।
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पीड़िता, CBI और विरोध प्रदर्शन की भूमिका
सुनवाई में CBI द्वारा दायर याचिका के अलावा अन्य वकीलों की याचिकाओं पर भी विचार हुआ। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। इन याचिकाओं में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जमानत रद्द करने की मांग की गई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराध में जमानत देना समाज में गलत संदेश देगा। पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता और कानून के महत्वपूर्ण सवालों पर विचार जरूरी है। सुनवाई में अदालत ने सेंगर की पिछली सजा और जेल में बिताए समय का मूल्यांकन किया। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट की जमानत रोकते हुए विस्तृत सुनवाई तय की। अदालत ने न्यायपालिका के प्रति समाज के भरोसे को बनाए रखने का महत्व बताया।
सेंगर 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की जेल सजा रद्द कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि वह पहले ही सात साल पांच महीने जेल में रह चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को फिलहाल रोककर न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता जताई है। हाई कोर्ट के आदेश पर रोक का मतलब है कि सेंगर जेल में ही रहेंगे। अदालत ने कानून और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समीक्षा का संकेत दिया। यह कदम न्यायपालिका की संवेदनशीलता और गंभीर अपराध में कठोर रुख को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पीड़िता और समाज के न्याय की रक्षा में अहम साबित होगा। मामला साबित करता है कि गंभीर अपराध में न्याय प्रणाली को सख्ती से कार्य करना चाहिए।

