मुंबई के एक व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बैंक की जिम्मेदारी मानने से इनकार कर दिया। पीड़ित ने धोखाधड़ी करने वालों के साथ OTP साझा किया था, जिसके बाद उसके खाते से 1.25 लाख रुपये निकल गए। आयोग ने कहा कि ग्राहक की लापरवाही इस नुकसान की मुख्य वजह बनी।
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मामले के अनुसार, ठगों ने खुद को नेटफ्लिक्स से जुड़ा प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति से संपर्क किया। उन्होंने अकाउंट अपडेट के नाम पर OTP मांगा, जिसे पीड़ित ने साझा कर दिया। इसके तुरंत बाद उसके बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर हो गई।
पीड़ित ने बैंक पर सुरक्षा में चूक का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक ने पहले ही OTP गोपनीय रखने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। ऐसे में ग्राहक द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर बैंक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि डिजिटल लेनदेन में सतर्कता बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर OTP साझा करना गंभीर जोखिम पैदा करता है। आयोग ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सावधानी बरतने की अपील भी की।
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