बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी प्रिंस कुमार को बांका से पकड़ा है। यह गिरोह खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराता था। इसके बाद आरोपी डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
नौ राज्यों की 14 शिकायतों में आरोपी का बैंक खाता सामने आया
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया कि प्रिंस कुमार के बैंक खाते में नौ राज्यों के 14 लोगों से ठगी की रकम पहुंची थी। साइबर अपराधियों ने 14 और 15 जुलाई को रागिनी देवी को व्हाट्सएप कॉल किए थे। उन्होंने खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर महिला को डराया और डिजिटल अरेस्ट का झांसा दिया। इस तरह आरोपियों ने उनसे 3,47,999 रुपये की ठगी की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर पुलिस ने विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों की जांच के जरिए गिरोह का पता लगाया। जांच के दौरान पुलिस को उत्तर प्रदेश के देवरिया में गिरोह के एक सदस्य की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने बरियारपुर इलाके में छापेमारी कर दीपू कुशवाहा को गिरफ्तार किया। अब पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े सबूत मिलने के बाद प्रिंस कुमार को भी दबोच लिया।
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सीबीआई अधिकारी बनकर महिला से 3.47 लाख रुपये की ठगी
जांच में पता चला कि प्रिंस कुमार के बैंक खाते के खिलाफ नौ अलग-अलग राज्यों से 14 साइबर शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने ठगी की रकम में से 2,64,748 रुपये बैंक खाते में फ्रीज करा दिए हैं। इससे पीड़िता की ठगी गई राशि का बड़ा हिस्सा सुरक्षित करने में मदद मिली है। पुलिस अब इस रकम को पीड़िता के खाते में वापस भेजने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
मुजफ्फरपुर पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क का पता लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस लोगों से अपील करती है कि वे अनजान कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वालों पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी डिजिटल अरेस्ट की धमकी मिलने पर संबंधित साइबर पुलिस से संपर्क करें।

