एनसीपीआई में टीएमसी सांसदों का विलय इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस दावे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं और संभावित बदलावों को जन्म दिया। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के 20 कथित बागी सांसदों के कदम ने बहस तेज कर दी।
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एनसीपीआई में टीएमसी सांसदों का विलय क्यों चर्चा में है?
हालांकि, किसी पक्ष ने बागी सांसदों की आधिकारिक और प्रमाणित सूची जारी नहीं की। वहीं, यह पूरा मामला चुनाव आयोग और दल बदल कानून से भी जुड़ गया है। एनसीपीआई ने बीस जनवरी 2023 को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा हासिल किया। इसके बाद पार्टी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन कोई सीट जीत नहीं सकी।फिर भी, पार्टी ने अपने ताजा दावों से राजनीतिक सुर्खियां लगातार बटोरी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पार्टी को अब तक लगभग एक लाख रुपये मिले। दूसरी ओर, कई विश्लेषक इस घटनाक्रम को बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मानते। इसी बीच, दल बदल कानून ने पूरे विवाद को और जटिल बना दिया। अब चुनाव आयोग की भूमिका इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही। इसी कारण एनसीपीआई में टीएमसी सांसदों का विलय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना।

