Silver Rate Prediction: साल की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी दर्ज कर चांदी ने बाजार को चौंका दिया था। जनवरी के आखिर में चांदी पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई थी। हालांकि, इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई। अब निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि मार्च में चांदी की दिशा क्या रहेगी। दरअसल, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के दबाव में कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी कीमती धातुओं पर असर डाला। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर बिकवाली की, जिससे भाव तेजी से फिसले।
चांदी के फंडामेंटल मजबूत, मार्च में रुख पर नजर
इसके बावजूद, जानकारों का मानना है कि चांदी की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती औद्योगिक मांग लंबी अवधि में कीमतों को सहारा दे सकती है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर सप्लाई सीमित रहने की आशंका भी बाजार को समर्थन दे रही है। ऐसे में मार्च का महीना चांदी के लिए अहम माना जा रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है, तो कीमतों में फिर से तेजी लौट सकती है। हालांकि, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की नजर बनी रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर 29 जनवरी को चांदी ने ₹4,20,000 प्रति किलो का सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया था। इसके बाद कीमतों में लगभग 46% की गिरावट दर्ज की गई और भाव करीब ₹2 लाख तक फिसल गए। इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी मजबूत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगातार सप्लाई घाटा, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से बढ़ती औद्योगिक मांग के साथ निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी मध्यम और लंबी अवधि में कीमतों को सहारा दे सकती है।
चांदी पर एक्सपर्ट की राय: मार्च में तेजी के संकेत
वेंचुरा के कमोडिटी प्रमुख एनएस रामास्वामी का कहना है कि मौजूदा करेक्शन का पैटर्न पहले जैसा ही है और आगे फिर तेजी लौट सकती है। उनके मुताबिक, 20 फरवरी तक चलने वाले चीनी नववर्ष के दौरान बाजार में आमतौर पर कम भागीदारी और उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके बाद लिक्विडिटी और फिजिकल डिमांड बढ़ने से फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में तेजी आ सकती है। वहीं, ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि फिलहाल चांदी $70 से $90 (करीब ₹2,25,000 से ₹2,85,000) के दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकती है। उन्होंने ट्रेडर्स को गिरावट में खरीदारी और उछाल पर मुनाफावसूली की रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग में इजाफा हुआ है, जिसका फायदा सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं को मिल सकता है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट से निकलकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। हालांकि, दूसरी ओर अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल बाजार जून 2026 से संभावित दर कटौती की उम्मीद जता रहा है। यदि ब्याज दरों में नरमी आती है, तो डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है और इसका सकारात्मक असर कीमती धातुओं की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। वहीं, अगर दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो चांदी की चाल सीमित दायरे में रह सकती है।
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