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    माधुरी हथिनी की वापसी के लिए महाराष्ट्र सरकार-मठ मिलकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

    Supreme

    महाराष्ट्र सरकार ने हथिनी ‘माधुरी’ को वापस लाने के लिए उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों और नंदनी मठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और मंत्री चंद्रकांत पाटिल सहित कई नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य माधुरी को वनतारा से वापस लाने की रणनीति बनाना था। सरकार और मठ ने तय किया कि वे मिलकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।इस निर्णय को धार्मिक आस्था और स्थानीय जनभावनाओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

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    कोल्हापुर में विरोध प्रदर्शन और दो लाख लोगों ने किए हस्ताक्षर

    मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस कानूनी लड़ाई में मठ के साथ खड़ी रहेगी। सरकार माधुरी के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए विशेष पशु चिकित्सक दल गठित करेगी।बैठक में शामिल सभी नेताओं ने हाथी को वापस लाने की प्रक्रिया को समर्थन देने की बात कही।‘माधुरी’ नाम की हथिनी पिछले 34 वर्षों से कोल्हापुर स्थित नंदनी मठ में रह रही थी। लोग उसे महादेवी के नाम से पूजते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में उसका स्थान पवित्र है। 16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने माधुरी को वनतारा भेजने का आदेश पारित किया था। यह आदेश PETA इंडिया द्वारा उसकी सेहत और मानसिक स्थिति पर चिंता जताने के बाद आया।

    माधुरी को वंतारा भेजे जाने के बाद कोल्हापुर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। स्थानीय लोगों ने जुलूस निकाले और उसकी वापसी के लिए आंदोलन शुरू किया। करीब दो लाख लोगों ने हाथी की वापसी के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाया।
    लोगों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर माधुरी की वापसी की मांग की। धार्मिक संगठनों ने उसे देवी का स्वरूप मानते हुए कानून से पुनर्विचार की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि माधुरी किसी जीव मात्र नहीं बल्कि समाज की आस्था का प्रतीक है।
    राज्य सरकार ने इन जनभावनाओं को गंभीरता से लेते हुए कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया। फडणवीस सरकार ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था की रक्षा सर्वोपरि मानी जाएगी।

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    वंतारा ने भी माधुरी की वापसी को लेकर जताया सहयोग

    फडणवीस सरकार और नंदनी मठ ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि सरकार जनभावनाओं के साथ खड़ी है। नंदनी मठ के संतों और अनुयायियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकार ने मठ को कानूनी, तकनीकी और चिकित्सा सहायता देने का आश्वासन भी दिया। एक संयुक्त टीम सुप्रीम कोर्ट में माधुरी की वापसी को लेकर पुनर्विचार याचिका पेश करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामला धार्मिक भावना और पशु कल्याण के संतुलन से जुड़ा है। सरकार अदालत को साबित करेगी कि माधुरी की देखभाल पहले से ही मठ में हो रही थी। फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार मठ की गरिमा और परंपरा को पूर्ण समर्थन देगी।

    वंतारा वाइल्डलाइफ सेंटर ने स्पष्ट किया कि वह कोर्ट के आदेशों का सम्मान करेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट वापसी की अनुमति देता है तो वंतारा पूरी सहायता प्रदान करेगा। संस्था ने कोल्हापुर में एक सैटेलाइट पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। वंतारा की टीम तकनीकी और चिकित्सा सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि माधुरी की भलाई सर्वोपरि है, चाहे वह कहीं भी रहे। संस्था ने नंदनी मठ के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने की बात कही। सरकार, मठ और वंतारा मिलकर इस मामले को अदालत में पेश करेंगे। संयुक्त प्रयासों से यह मामला अदालत और समाज दोनों में संतुलन ला सकता है। अब पूरा राज्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है।

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