महाशिवरात्रि शिववास 2026 : महाशिवरात्रि के दिन शिववास का महत्व बहुत खास होता है। इस दिन शिववास की स्थिति जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय अनुष्ठान के दौरान शिववास का सही स्थान देखे बिना पूजा करने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि महाशिवरात्रि पर शिववास कहां रहेगा और इसे पूजा में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव हर माह में सात अलग-अलग स्थानों पर निवास करते हैं, जिन्हें शिववास कहा जाता है। शिववास की गणना करने के लिए माह को दो भागों में बांटा जाता है— शुक्ल पक्ष (1 से 15 तारीख) और कृष्ण पक्ष (16 से 30 तारीख)। गणना करने के लिए तिथि को 2 से गुणा करके, परिणाम में 5 जोड़कर उस योग को 7 से भाग दिया जाता है। शेषफल के आधार पर शिववास का स्थान तय होता है। उदाहरण के तौर पर, शेषफल 1 पर शिववास कैलाश में होता है, जो शुभ और सुखदायक होता है, जबकि शेषफल 0 पर शिववास श्मशान में होता है, जो मृत्यु का संकेत देता है।
महाशिवरात्रि पर शिववास: इसका महत्व और क्यों है यह खास
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर निवास करते हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। हालांकि, महाशिवरात्रि को निष्काम पूजा का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन शिव पूजन बिना शिववास देखे भी किया जा सकता है। लेकिन यदि आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र अनुष्ठान या किसी विशेष पूजा के माध्यम से मनोकामनाओं की पूर्ति चाहते हैं, तो शिववास देखना जरूरी होता है, क्योंकि ऐसे अनुष्ठान में शिववास की गणना का विशेष महत्व है।
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