PM नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से स्काईरूट का उद्घाटन किया। उन्होंने अत्याधुनिक ‘इनफिनिटी कैंपस’ का शुभारंभ कर भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में निजी योगदान सराहा। प्रधानमंत्री ने स्काईरूट के प्रथम कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-I’ का भी अनावरण किया। यह रॉकेट उपग्रहों को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता रखता है।मोदी ने कहा कि निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने स्काईरूट के परिसर को नवाचार, तकनीक और युवा शक्ति का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप्स की भागीदारी से भारत की अंतरिक्ष संभावनाओं को उज्जवल बताया।
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इनफिनिटी कैंपस की विशेषताएं
‘इनफिनिटी कैंपस’ लगभग दो लाख वर्ग फुट में फैला अत्याधुनिक केंद्र बन गया है। यह परिसर बहु-प्रक्षेपण वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण की सुविधा प्रदान करता है। कंपनी इस परिसर में प्रति माह एक कक्षीय रॉकेट तैयार करने की क्षमता विकसित करेगी। कैंपस भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह केंद्र अनुसंधान, नवाचार और परीक्षण को एकीकृत करके अंतरिक्ष उद्योग को मजबूत बनाएगा। कंपनी के अभियंता और वैज्ञानिक रॉकेट निर्माण और प्रक्षेपण पर लगातार कार्य कर रहे हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों और IIT पूर्व छात्रों ने की।
पवन चंदना और भरत ढाका ने नवाचार और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ कंपनी की नींव रखी। नवंबर 2022 में कंपनी ने अपना सब-ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-S’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस उपलब्धि के साथ यह अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बनी। पूर्व वैज्ञानिकों ने अनुसंधान, विकास और परीक्षण के क्षेत्र में स्टार्टअप को नई दिशा दी।
PM : निजी अंतरिक्ष उद्योग और युवा शक्ति
PM मोदी ने कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी से नई संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने बताया कि युवा शक्ति और नवाचार अंतरिक्ष उद्योग में अवसर और विकास का प्रमुख स्रोत हैं। निजी कंपनियां रॉकेट निर्माण और उपग्रह प्रक्षेपण में तेजी और उच्च दक्षता ला रही हैं। प्रधानमंत्री ने स्काईरूट के उदाहरण को नवाचार और तकनीकी प्रगति का प्रेरक बताया। यह उद्योग युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी करियर के नए अवसर उपलब्ध कराता है। ‘इनफिनिटी कैंपस’ भविष्य में बहु-प्रक्षेपण वाहनों के निर्माण और परीक्षण पर केंद्रित रहेगा।
कंपनी कक्षीय रॉकेट निर्माण के माध्यम से भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष आवश्यकताओं को पूरा करेगी। स्काईरूट की टीम भविष्य में और अधिक उन्नत रॉकेट और उपग्रह प्रक्षेपण तकनीक विकसित करेगी। यह पहल भारत में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में है। कंपनी का लक्ष्य भारत को अंतरिक्ष तकनीक में वैश्विक नेता और नवाचार में अग्रणी बनाना है।
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