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    UGC नियमों पर सवर्ण समाज का विरोध, यूपी में प्रदर्शन, 2027 की चेतावनी

    सवर्ण

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार और मंगलवार को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। स्वर्ण आर्मी और करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने जौनपुर, मिर्जापुर, देवरिया समेत कई जिलों में जोरदार प्रदर्शन किया। जौनपुर में कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर तिराहे से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर नारेबाजी की, जबकि मिर्जापुर में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    देवरिया में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सरकार पर सवर्ण विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखा विरोध जताया। लखनऊ में भी आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। करणी सेना ने 27 जनवरी की शाम परिवर्तन चौक पर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूजीसी नियमों में असमानता है और सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी की जा रही है। जौनपुर में स्वर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष प्रवीण तिवारी और करणी सेना के सुजीत सिंह ने कहा कि भाजपा अपने कोर वोटर्स के साथ अन्याय कर रही है। उनका आरोप है कि यूजीसी कमेटी में सवर्ण समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

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    मिर्जापुर में विरोध जौनपुर और की गूंज

    पूर्व छात्र नेता विशाल सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह सरकार को गर्त में ले जाएगा और इसके परिणाम 2027 में सामने आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियम छात्रों के बीच भेदभाव पैदा कर रहे हैं और मामूली मामलों में भी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इस कानून को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

    मिर्जापुर में भारी जुलूस निकालकर कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि अगर यह कानून वापस नहीं लिया गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। देवरिया में प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि कमेटी में अपने प्रतिनिधि न होने से छात्रों, खासकर बेटियों को न्याय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि चार साल की सजा का प्रावधान युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर सकता है।

    राजधानी लखनऊ में करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने सवर्ण समाज से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे समाज को बांटने वाले इस कानून को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। एटा, बागपत और अमेठी में भी यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

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