उदयगिरि का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने किया है, जबकि हिमगिरि को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने तैयार किया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि उदयगिरि नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया 100वां जहाज है।
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पहली बार दो अलग शिपयार्ड में बने युद्धपोतों का एक साथ कमीशन नौसेना की युद्ध तत्परता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह पहली बार होगा जब दो अलग-अलग शिपयार्ड में बनाए गए अग्रिम पंक्ति के सतही लड़ाकू जहाजों को एक साथ कमीशन किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि इन युद्धपोतों के शामिल होने से नौसेना की युद्ध तत्परता बढ़ेगी और भारत के युद्धपोत डिजाइन व निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के संकल्प की पुष्टि होगी। कमीशन होने के बाद ये दोनों जहाज पूर्वी बेड़े में शामिल होंगे, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में देश के समुद्री हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।
उदयगिरि और हिमगिरि का जलावतरण दर्शाता है आत्मनिर्भरता 2025 में अन्य स्वदेशी पोतों का जलावतरण होगा
उदयगिरि’ और ‘हिमगिरि’ का जलावतरण नौसेना की युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके बाद नौसेना 2025 में अन्य स्वदेशी पोतों का जलावतरण करेगी, जिनमें विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि, पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर, एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला और डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार शामिल हैं।


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