अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर पिछले चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी हैं। इसके अलावा तालिबान सरकार ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तथापि, तालिबान के एक मंत्री ने बताया कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान में घुस चुके हैं। साथ ही तालिबान ने क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा में कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए हैं। इस कारण पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ गया है और स्थानीय सैन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति और बिगड़ने पर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संघर्ष संभव है।
इसके बाद पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अफगानिस्तान के कई ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। तालिबान ने पुष्टि की कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें नूर खान एयरबेस भी शामिल था। इसके अलावा क्वेटा में 12वीं कोर का मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा का सैन्य कैंप भी हमला झेल चुका है। इस प्रकार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात बन गए हैं। वास्तव में, संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को पाकिस्तान द्वारा सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक से हुई थी।
इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों में सैन्य गतिशीलता और सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं। इस बीच, नागरिक क्षेत्र में भी तनाव और घबराहट फैल गई है, जिससे आम लोग प्रभावित हुए हैं।
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पाकिस्तान ने तालिबान पर कड़ा हमला बोला
पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि TTP ठिकानों पर कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया। इससे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया। अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान में जवाबी हमले किए। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया गया। मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता पर हमला बताया। तालिबान सरकार ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया।
सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के अनुसार अब तक 415 तालिबान लड़ाके मारे गए। 580 से अधिक तालिबान लड़ाके घायल हुए। 182 सैन्य पोस्ट तबाह की गईं। 31 पोस्टों पर पाकिस्तान ने कब्जा किया। 185 टैंक और वाहन नष्ट हुए। पाकिस्तानी वायुसेना ने नंगरहार और कंधार के मुख्यालयों को निशाना बनाया। तालिबान ने दावा किया कि उसके केवल 8–13 लड़ाके मारे गए।
तालिबान ने कहा कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। कई चौकियों पर तालिबान ने कब्जा किया। तालिबान ने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने हमला जारी रखा तो कड़ा जवाब मिलेगा। खैबर पख्तूनख्वा में मस्जिद और अस्पताल क्षतिग्रस्त हो गए।
कई नागरिक घायल हुए और धुआं उठता दिखाई दिया। पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई।
सूचना मंत्री ने तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताया। महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन उजागर किया। दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर विवाद जारी रहा। 2021 में तालिबान नियंत्रण के बाद सीमा विवाद और हमलों की तीव्रता बढ़ गई।
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