अमेरिका के टेक्सास में 2024 में स्थापित बजरंग बली की 90 फुट ऊंची मूर्ति अब विवाद का कारण बन गई है। गदा धारण किए भगवान हनुमान की यह विशाल प्रतिमा स्थानीय हिंदू समुदाय की निजी जमीन पर बनाई गई थी। हालांकि, टेक्सास के कुछ कंज़र्वेटिव एक्टिविस्ट ने इसे अमेरिकी जमीन पर भारतीय कब्जा बताकर आलोचना की है। इस विवाद ने भारतीय मूल के अमेरिकियों में गुस्सा और प्रतिक्रिया की लहर पैदा कर दी है। वे स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि इस मूर्ति पर टिप्पणी करना अनुचित और अस्वीकार्य है। इसके अलावा, स्थानीय हिंदू समुदाय ने इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धा का प्रतीक बताया। इसलिए, विवाद ने सोशल मीडिया पर तीव्र बहस और प्रतिक्रियाएँ जन्म दी हैं।
डलास-फोर्ट वर्थ इलाके के रिपब्लिकन एक्टिविस्ट कार्लोस टर्सियोस ने हनुमान मूर्ति का वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि “थर्ड वर्ल्ड के एलियंस धीरे-धीरे अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं।” इसके तुरंत बाद भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने कड़ा जवाब देना शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है और हिंदुओं ने अपनी जमीन पर मंदिर बनाया है। एक यूजर ने लिखा कि अमेरिका फर्स्ट की सोच नस्लभेदी नॉस्टैल्जिया के रूप में सामने आई है। इसी बीच, दूसरे ने डेटा के जरिए इंडियन-अमेरिकन्स के घुलने-मिलने को समझाया। उन्होंने बताया कि भाषा के आँकड़े अमेरिकी समाज में सांस्कृतिक एकीकरण का मजबूत संकेत देते हैं।
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मूर्ति और निर्माण की विशेषताएँ
टेक्सास में हनुमान मूर्ति 2024 में पंचलोहा अभय हनुमान के नाम से स्थापित की गई थी। यह 90 फुट ऊंची प्रतिमा नॉर्थ अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान मूर्तियों में से एक है। स्थापना के समय पास के एक चर्च से जुड़े लोगों ने विरोध जताया था, लेकिन मंदिर ने निर्माण जारी रखा। भगवान हनुमान की यह मूर्ति मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं और स्थानीय समुदाय के लिए प्रतीक बन गई। इसके उद्घाटन समारोह का आयोजन अगस्त 2024 में किया गया और लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
इस प्रतिमा ने टेक्सास और अमेरिका में हिंदू धर्म और सांस्कृतिक पहचान को उजागर किया। इसके अलावा, यह मूर्ति श्रद्धा, शक्ति और समुदाय के समर्पण का प्रतीक भी मानी जाती है।
कार्लोस टर्सियोस के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई और कई प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। भारतीय अमेरिकी समुदाय ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सांस्कृतिक पहचान पर सवाल उठाना गलत है। वे लगातार डेटा और तर्क के जरिए अमेरिकी समाज में भारतीय समुदाय की स्थिति को दिखा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सांस्कृतिक सम्मान और पहचान के मुद्दे अब सोशल मीडिया पर भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, विवाद ने अमेरिकी समाज में बहुसांस्कृतिक सह-अस्तित्व और समझ का महत्व भी उजागर किया। इसके अलावा, यह घटना यह दिखाती है कि धार्मिक प्रतीकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भावनाएँ तीव्र हो सकती हैं। इसलिए, टेक्सास हनुमान मूर्ति विवाद ने केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक ध्यान भी आकर्षित किया है।
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