अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान के बगराम एयर बेस पर फिर से तैनात हो सकते हैं। उन्होंने इस बात को ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बताया और कहा कि अमेरिका उस बेस को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने यह घोषणा ब्रिटेन दौरे के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री केयर स्टॉर्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। उनका कहना था कि बगराम एयर बेस अमेरिका के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वे इसे इसलिए वापस लेना चाहते हैं क्योंकि यह चीन के नजदीक है। ट्रंप के इस बयान ने अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
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ट्रंप ने बगराम एयर बेस को लेकर बड़ा बयान दिया
ट्रम्प ने बगराम एयर बेस की अहमियत को चीन के परमाणु हथियार केंद्र के करीब होने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह बेस उस इलाके से एक घंटे की दूरी पर है, जहां चीन अपने परमाणु हथियार बनाता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बताया। उनका कहना था कि बगराम एयर बेस पर अमेरिकी सेना की उपस्थिति चीन के मुकाबले में सहायक होगी। वे इसे एक रणनीतिक कदम बता रहे हैं। इस बयान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीति पर नए सवाल उठाए हैं। अमेरिका इस कदम से चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देना चाहता है।
ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि तालिबान आर्थिक संकट और आंतरिक कलह से जूझ रहा है। वे मानते हैं कि तालिबान अमेरिका की वापसी के लिए तैयार हो सकता है। 2021 में अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान ने सत्ता संभाली थी। उस समय से तालिबान को अंतरराष्ट्रीय वैधता हासिल करने में भी मुश्किलें आ रही हैं। आंतरिक राजनीतिक संघर्ष और प्रतिद्वंद्वी आतंकवादी समूहों से तालिबान जूझ रहा है। ट्रंप के अनुसार, यह स्थिति अमेरिकी सेना की वापसी के लिए अवसर पैदा कर सकती है। तालिबान भी शांति वार्ता और समझौते की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
बगराम एयर बेस चीन के करीब है, इसलिए अहम है
करीब चार साल पहले अमेरिका ने अचानक अफगानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुला लिए थे। इसके बाद तालिबान ने तेजी से अफगानिस्तान के अधिकांश इलाकों पर कब्जा कर लिया। बगराम एयर बेस समेत पूरे देश में तालिबान की सत्ता स्थापित हो गई। अफगानिस्तान अमेरिका के सबसे लंबे चले युद्ध का केंद्र था। इस युद्ध में अमेरिकी सैनिकों और तालिबान के बीच कई साल तक संघर्ष चला। व्हाइट हाउस ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि अमेरिका और तालिबान के बीच कोई नई बातचीत हुई है या नहीं। स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
बगराम एयर बेस अफगानिस्तान के परवान प्रांत में है, जो काबुल से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस एयरफील्ड का रनवे लंबा और व्यापक है, जो बमवर्षक और भारी मालवाहक विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। ट्रंप ने कुछ समय पहले दावा किया था कि चीन ने इस बेस को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, यह दावे अभी स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुए हैं। अमेरिकी सैन्य रणनीति में इस एयर बेस की अहमियत इसलिए है क्योंकि इससे क्षेत्रीय नियंत्रण और तेजी से सैन्य कार्रवाई संभव होती है। ट्रंप का बयान क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा को लेकर नई बहसों को जन्म दे रहा है।

