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    अहमदाबाद ग्लोबल स्पोर्ट्स सेंटर: 400 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, ओलंपिक 2036 की तैयारी

    अहमदाबाद

    अहमदाबाद तेजी से खुद को एक अंतरराष्ट्रीय खेल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नगर निगम के 2026-27 बजट में खेल बुनियादी ढांचे के लिए भारी निवेश इस बात का संकेत है कि शहर केवल विकास नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान बनाने की तैयारी में है। अहमदाबाद ग्लोबल स्पोर्ट्स सेंटर इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है।

    यह परियोजना केवल स्टेडियम निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल संस्कृति, युवाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की क्षमता विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। बजट में खेलों के लिए अलग से बड़े पैमाने पर राशि निर्धारित की गई है, जो शहर की प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाती है।

    400 करोड़ से ज्यादा का खेल निवेश

    अहमदाबाद नगर निगम ने इस वित्त वर्ष में खेल बुनियादी ढांचे के लिए 430 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। इसमें छह बड़े खेल परिसर और पांच छोटे खेल परिसरों का निर्माण शामिल है। जिम, स्विमिंग पूल और सार्वजनिक खेल मैदानों के लिए भी विशेष राशि निर्धारित की गई है।

    यह निवेश दर्शाता है कि शहर केवल एलीट स्तर के खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खेल सुविधाएं विकसित करना चाहता है। यदि इन परिसरों तक किफायती पहुंच सुनिश्चित की जाती है, तो यह शहर में खेल संस्कृति को मजबूत आधार दे सकता है।

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    ओलंपिक 2036 की तैयारी का मजबूत कदम

    2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी को 2036 ओलंपिक की दावेदारी की दिशा में अहम माना जा रहा है। अहमदाबाद-गांधीनगर को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर स्थापित करने के लिए यह परियोजना आधारभूत ढांचा तैयार कर रही है।

    शहरी परिवहन में भी बड़े निवेश किए गए हैं, जिनमें मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, डिजिटल ट्रैफिक सिस्टम और इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार शामिल है। ये सभी कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शहर को तैयार करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

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    क्या केवल इंफ्रास्ट्रक्चर काफी है?

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खेल परिसर बनाना सफलता की गारंटी नहीं देता। खिलाड़ियों के विकास के लिए कोचिंग सिस्टम, खेल विज्ञान और प्रतिभा पहचान कार्यक्रमों में निरंतर निवेश जरूरी है।

    साथ ही, रखरखाव और संचालन की स्पष्ट योजना भी आवश्यक है। यदि सुविधाओं का सही प्रबंधन नहीं हुआ, तो बड़े निवेश के बावजूद उनका उपयोग सीमित रह सकता है। इसलिए दीर्घकालिक रणनीति और पारदर्शी क्रियान्वयन इस परियोजना की सफलता की कुंजी होगी।

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