केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में तिरंगा यात्रा निकालकर साफ संदेश दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार देश से एक-एक घुसपैठिए को बाहर निकालेगी। शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता घुसपैठियों के वोट के सहारे सत्ता हासिल करना चाहते हैं, इसलिए वे SIR का विरोध कर रहे हैं। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद अमित शाह ने हैदराबाद की सड़कों पर उतरकर तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया। उनके इस कदम ने यह संदेश दिया कि बीजेपी राजनीतिक विरोध या परिस्थितियों की परवाह किए बिना अपना अभियान जारी रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और मतदाता सूची की शुद्धता के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
हैदराबाद में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन, SIR पर पीछे हटने से किया इनकार
अमित शाह ने रामलीला मैदान में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए, जिससे नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि बीजेपी SIR से जुड़े मुद्दों पर जवाब क्यों नहीं देती। शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। उन्होंने हटाए गए नामों के पीछे अलग-अलग कारण गिनाए। शाह के मुताबिक, इनमें तीन करोड़ मृत मतदाता, डेढ़ करोड़ डुप्लीकेट नाम और तीन करोड़ घुसपैठिए शामिल थे। उन्होंने विपक्ष को संसद में आकर SIR पर बहस करने की चुनौती भी दी और भरोसा दिलाया कि सरकार हर सवाल का जवाब देगी।
बीजेपी ने देशभर में पदयात्राएं और मार्च निकालकर विपक्ष के विरोध का जवाब दिया। कांग्रेस भले ही रामलीला मैदान की रैली और सोशल मीडिया पर उसकी लोकप्रियता को अपनी राजनीतिक सफलता मान रही हो, लेकिन इस विरोध ने बीजेपी के संगठन और कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव से काफी पहले ही मैदान में उतार दिया है। इससे बीजेपी को अपने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर मिला है। खास बात यह है कि फिलहाल देश में अगले कुछ महीनों तक बड़े चुनाव नहीं हैं, फिर भी पार्टी ने अपना जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।
राहुल गांधी के आरोपों पर अमित शाह का पलटवार, संसद में बहस की दी चुनौती
इस बीच, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं के विवादित बयानों ने बीजेपी को एक नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने अयोध्या और राम मंदिर को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवान राम का जन्म उसी स्थान पर हुआ था, जहां आज राम मंदिर बना है, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है। उनके इस बयान का बजरंग दल ने विरोध किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। हालांकि, धार्मिक आस्था से जुड़े राजनीतिक बयानों का जवाब लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से देना चाहिए। इस तरह की धमकियां राजनीतिक बहस का स्तर गिराती हैं और विवाद को और बढ़ाती हैं।
समाजवादी पार्टी के एक अन्य नेता शिवशंकर यादव ने भी धार्मिक परंपराओं को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने शादी और तेरहवीं जैसे आयोजनों में पंडितों द्वारा पढ़े जाने वाले मंत्रों पर आपत्तिजनक सवाल उठाए। उनके बयान से उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण समाज में नाराजगी फैल गई और कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। शुरुआत में यादव ने वीडियो को AI से तैयार बताया, फिर उसे पुराना कहकर सफाई दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह ब्राह्मणों का सम्मान करते हैं। हालांकि, वीडियो में PDA का जिक्र होने से उनके पुराने होने के दावे पर सवाल उठे, क्योंकि अखिलेश यादव ने 2024 में इस राजनीतिक नारे को प्रमुखता से उठाया था। इन घटनाओं ने बीजेपी को समाजवादी पार्टी पर धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाने का मौका दिया है।
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