पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दिल्ली में मोर्चा खोल दिया।
तीन दिनों में ममता ने सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होकर और चुनाव आयोग के साथ बैठक कर केंद्र सरकार पर कड़ा दबाव डाला।
संसद से सड़क तक संघर्ष करने वाली नेता के रूप में जानी जाने वाली ममता ने अब अदालत में जजों के सामने दलीलें भी दीं।
एसआईआर का मुद्दा अदालत से लेकर चुनाव आयोग तक उठाने से यह संदेश गया कि ममता किसी भी स्तर पर लड़ाई लड़ सकती हैं।
उनकी राजनीतिक शैली रही है कि किसी भी टकराव का मोर्चा वह खुद संभालती हैं, चाहे वह संस्थान से हो या किसी राजनीतिक पार्टी से।
ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा बना चुनाव से पहले राजनीतिक जोर का संकेत
उन्होंने सफेद साड़ी के ऊपर काला रंग पहनकर विरोध जताया।
तृणमूल कांग्रेस एसआईआर से प्रभावित करीब 50 लोगों को दिल्ली लाई।इस कदम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
ममता बनर्जी ने दिल्ली में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।उन्होंने पश्चिम बंगाल में भी ऐसे परिवारों से बातचीत की।
सबीर अहमद के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम में नाटकीयता दिखी।पहनावे और बंग भवन की गतिविधियों पर खास ध्यान गया।
प्रभावित लोग इन प्रतीकों से खुद को जुड़ा महसूस कर रहे हैं।
अहमद कहते हैं कि ममता को अक्सर ‘बेगम ममता’ कहा जाता है।वह सांप्रदायिक राजनीति के दबाव का सामना करती हैं।
इसी कारण वह कई बार हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल करती हैं।
राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने अलग नजरिया रखा।उनके अनुसार ममता ने प्रभावित हिंदू महिलाओं को साथ रखा।
इससे उन्होंने सभी मतदाताओं की आवाज बनने का संदेश दिया।
वह इस मुद्दे पर खुद को मजबूत नेता के रूप में पेश कर रही हैं।
अगर चाहें तो मैं इसे अख़बार के लिए और भी सख़्त न्यूज़ कॉपी या हेडलाइन-सबहेडलाइन
Also read:https://centraltimes.in/sports/t20-world-cup-tilak-varma-injury-comeback-no-3-batting/


[…] Also Read: ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में… […]