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    डोकलाम: भारत की सेना ने 73 दिन चीन का सामना किया

    भारत

    भारत ने अपनी संप्रभुता की हमेशा रक्षा की है। 2017 में, जब चीन ने डोकलाम में सड़क बनाने का प्रयास किया, भारत ने तुरंत विरोध किया। इसके बाद चीन भी अड़ा रहा। यह टकराव लगभग 73 दिनों तक चला, जिसमें दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी रहीं।

    लोकसभा में राहुल गांधी ने डोकलाम विवाद को उठाया और पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से कुछ दावे किए। सरकार की ओर से राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए इसे संसद में चर्चा का आधार नहीं बनाया जा सकता। इस पर लगभग 45 मिनट तक बहस चली।

    डोकलाम भारत की पूर्वी सीमा से जुड़ा हुआ है। यह तीन देशों—भारत, भूटान और चीन—की सीमाओं के मिलन बिंदु पर स्थित है। भूटान इसे अपना क्षेत्र मानता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग प्रांत का हिस्सा बताता है। भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि चीन इस पर कब्जा कर लेता या सड़क बना लेता, तो सिलिगुड़ी कॉरिडोर प्रभावित हो सकता है।

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    डोकलाम विवाद और भारत की प्रतिक्रिया

    टकराव जून 2017 में शुरू हुआ, जब चीन ने पुरानी सड़क को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। भारतीय सेना ने 18 जून 2017 को करीब 270-300 सैनिकों के साथ हस्तक्षेप किया और निर्माण को रोका। दोनों सेनाओं के आमने-सामने खड़े रहने के बावजूद स्थिति नियंत्रण में रही। अंततः 28 अगस्त 2017 को दोनों देशों ने “एक्सपीडिशस डिसएंगेजमेंट” पर सहमति जताई और सैनिकों को वापस बुला लिया गया।

    इस विवाद को हल करने में NSA अजीत डोभाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जुलाई 2017 में उन्होंने बीजिंग जाकर चीनी अधिकारियों से बातचीत की। यह समझौता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुआ था। विवाद को स्थायी रूप से नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रतिनिधि मैकेनिज़म भी सक्रिय किया गया। इस तरह भारत ने भूटान के साथ मिलकर अपनी संप्रभुता की रक्षा सुनिश्चित की।

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