भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए) की घोषणा की, जिसे अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 24 जनवरी को कहा कि “यूरोप के हमारे सहयोगियों ने रूस से तेल खरीदने के बदले भारत पर टैरिफ लगाने से इनकार किया क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते पर ध्यान दे रहे थे। यूरोप यूक्रेन के खिलाफ रूस की लड़ाई में स्वयं मदद कर रहा है।”
बेसेंट ने कहा कि अमेरिका चाहता था कि यूरोप भी भारत पर टैरिफ लगाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यूरोप यूक्रेन पर रूसी हमले को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है, लेकिन रूस से तेल खरीदने के बहाने अमेरिका ने टैरिफ लागू किया।
पिछले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली आए थे, और अगले महीने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत का दौरा करेंगे।
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भारत और ईयू ने एफटीए के जरिए रणनीति बनाई
दिल्ली स्थित ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत अमेरिका की असहजता की परवाह नहीं कर रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन इससे संतुष्ट नहीं है।
श्रीवास्तव ने बताया कि “अमेरिका में कूटनीतिक माहौल अब पहले जैसा नहीं रहा है। ट्रंप प्रशासन का ध्यान घरेलू राजनीति और लेन-देन आधारित रिश्तों पर है, जिससे पारंपरिक सहयोग कमजोर हुआ है। भारत अमेरिकी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखना चाहता है, लेकिन वह यह भी समझता है कि मौजूदा हालात में ज्यादा निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है।”
उन्होंने कहा कि ट्रंप की विदेश नीति में निरंतरता नहीं रही है और पाकिस्तान, चीन और रूस के प्रति उनके रुख़ में बार-बार बदलाव हुआ है, जिससे भारत के लिए लंबी अवधि की रणनीति बनाना मुश्किल हो गया है। श्रीवास्तव ने जोड़ा, “भारत हर समय अमेरिकी असहजता के सामने झुकने वाला नहीं है।”
भारत अमेरिकी टैरिफ़ के प्रभाव को कम करने के लिए कई देशों के साथ नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए) कर रहा है।
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