भारत और यूरोपियन यूनियन 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट घोषित करेंगे
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) 27 जनवरी को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) घोषित करेंगे। यह समझौता दोनों पक्षों को अपने बाजारों में एक-दूसरे के उत्पादों को आसानी से बेचने का अधिकार देगा। भारत अपने उत्पादों को ईयू में कम या बिना टैरिफ़ के बेच सकेगा और ईयू के उत्पाद भारत में इसी तरह पहुंचेंगे। भारत ने अपने 77वें गणतंत्र दिवस पर ईयू प्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा कि यह समझौता ईयू को “फर्स्ट मूवर एडवांटेज” देगा और इसे लोग “मदर ऑफ़ ऑल डील्स” कह रहे हैं।
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अमेरिका के दबाव और वैश्विक रणनीति में भारत की पहल
भारत अमेरिका के बढ़ते व्यापारिक दबाव के बावजूद नए साझेदार खोज रहा है। अमेरिका के साथ एफटीए पर सहमति नहीं बन पाने और 50% टैरिफ़ झेलने के बावजूद भारत ने यूरोप, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन, चिली, पेरू और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेज़ कर दी है। यूरोप भी अमेरिका और रूस के दबावों के बीच भारत जैसे साझेदार के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ा रहा है।
भारत और ईयू के बीच समझौता दशकों की बातचीत का परिणाम है। भारत ने अपने कृषि और घरेलू हितों की सुरक्षा करते हुए एफटीए को संतुलित रखा है। यूरोप भारत के साथ ऊर्जा और रक्षा उपकरणों में निर्भरता कम करना चाहता है, जबकि भारत नए निवेश, तकनीक और रोजगार बढ़ाने के अवसर तलाश रहा है।

