• Fri. Oct 23rd, 2026

    IWT: पाकिस्तान की बढ़ेगी मुश्किल, भारत बनाएगा 5,500 MW हाइड्रो प्रोजेक्ट्स

    हाइड्रो

    भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के प्रति अपना रुख और अधिक सख्त कर लिया है। नई दिल्ली ने संकेत दिया है कि 1960 की संधि अब अपने मौजूदा स्वरूप में बहाल नहीं होगी। भारतीय सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान को पहले सीमा-पार आतंकवाद पर अपना रवैया बुनियादी रूप से बदलना होगा। सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान ने भरोसा तोड़ा और संधि की मूल भावना को कमजोर किया। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद 2025 में सिंधु जल संधि स्थगित कर दी थी। अब भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पुरानी व्यवस्था में लौटना आसान नहीं होगा। भारत भविष्य में किसी भी समझौते में जलवायु परिवर्तन और बदलती हाइड्रोलॉजी शामिल करना चाहता है। इसके अलावा, नई दिल्ली बढ़ती जल मांग, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा चिंताओं को भी शामिल करेगी। इस बीच, भारत जम्मू-कश्मीर में अपनी जलविद्युत क्षमता तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

    Also Read : राजीव चौक मेट्रो स्टेशन दिल्ली पर हंगामा, जंतर-मंतर में पत्थरबाजी; प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर उठे सवाल

    सिंधु जल विवाद के बीच भारत की बड़ी हाइड्रो योजना

    भारत आने वाले वर्षों में क्षेत्र में लगभग 5,500 मेगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ना चाहता है। इस योजना में सवालकोट, रातले, उरी, दुलहस्ती स्टेज-दो और क्वार परियोजनाएं शामिल हैं। भारत इस वर्ष किरू और पाकल दुल परियोजनाओं को भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से इन परियोजनाओं समेत कई भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध करता आया है। भारत के अनुसार, पाकिस्तान ने 70 से अधिक परियोजनाओं पर लगातार आपत्तियां दर्ज कराई हैं। 2023 में भारत ने बातचीत फिर शुरू करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान ने ठोस वार्ता से दूरी बनाई।

    भारत अब सिंधु नदी प्रणाली के अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग करना चाहता है। भारतीय अधिकारियों का दावा है कि पाकिस्तान अपने उपलब्ध पानी का बड़ा हिस्सा बर्बाद करता है। पाकिस्तान ने दशकों से कोई बड़ा नया जल भंडारण ढांचा भी विकसित नहीं किया है। आंतरिक प्रांतीय विवादों ने पाकिस्तान की जल प्रबंधन चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है। भारत का कहना है कि दशकों के आतंकवाद के बाद संधि की पुरानी व्यवस्था व्यावहारिक नहीं रही। पाकिस्तान ने मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की, लेकिन भारत ने इसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, स्थगित संधि के दौरान मध्यस्थता प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। हालांकि, भारत बाढ़ संबंधी जरूरी आंकड़े साझा करने की व्यवस्था जारी रखेगा।

    Also Read : 103 साल की हबीबन खातून को 32 साल बाद मिला ज़मीन का अधिकार, लंबी कानूनी लड़ाई का हुआ अंत

    Share With Your Friends If you Loved it!

    By aman