जापान के कुमामोटो प्रांत में आए शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को अचानक तेज झटकों से दहला दिया। भूकंप की तीव्रता 7.1 बताई गई, जिसके बाद अधिकारियों ने सुनामी चेतावनी तुरंत जारी की। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने अरियाके सागर और यात्सुशिरो सागर तटों पर चेतावनी जारी की। अधिकारियों ने लोगों से समुद्र तटों और तटीय क्षेत्रों से तुरंत दूर जाने की अपील की। एजेंसी ने बताया कि पहली सुनामी लहर कुछ देर बाद प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच गई। अधिकारियों ने लोगों को संभावित अगली लहरों को देखते हुए लगातार सतर्क रहने को कहा। भूकंप ने क्यूशू क्षेत्र के कई शहरों और कस्बों में लोगों को जोरदार झटके महसूस कराए। यात्सुशिरो, उतो, मशिकी और मिसातो में शिंदो पैमाने पर छह तीव्रता दर्ज की गई। कुमामोटो शहर के मिनामी वार्ड में भी लोगों ने तेज भूकंपीय झटके महसूस किए।
जापान भूकंप: कुमामोटो में बिजली गुल, 2016 की तबाही की यादें हुईं ताजा
जापान टाइम्स के मुताबिक, कई अन्य प्रांतों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस हुए। नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा और मियाजाकी में शिंदो पांच या अधिक दर्ज हुआ। जापान मौसम विभाग ने बताया कि भूकंप का केंद्र उकी शहर के पास स्थित था। भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर के दक्षिण में था और गहराई लगभग दस किलोमीटर थी। भूकंप के कारण कुमामोटो प्रांत में लगभग 45,600 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हुई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में बिजली बहाली और मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया। इस शक्तिशाली भूकंप ने अप्रैल 2016 की विनाशकारी कुमामोटो आपदा की यादें फिर ताजा कीं। 2016 में आए दो बड़े भूकंपों ने 278 लोगों की जान ली और हजारों घायल हुए। 14 और 16 अप्रैल को आए भूकंपों ने कुमामोटो में व्यापक तबाही मचाई थी।
भूकंपों ने ऐतिहासिक कुमामोटो किले को भी भारी नुकसान पहुंचाया और संरचनाओं को कमजोर किया। किले का पुनर्निर्माण जारी है और अधिकारी इसे 2052 तक पूरा करने की उम्मीद रखते हैं। 2016 की आपदा ने आसो ओहाशी ब्रिज को पूरी तरह ढहा दिया और सड़कें क्षतिग्रस्त कीं। भूकंपों ने रेलवे लाइनों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया। उस विनाशकारी आपदा ने जापान को लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया। ताजा भूकंप के बाद अधिकारी संभावित नुकसान और सुनामी प्रभावों पर लगातार नजर रख रहे हैं। जापानी एजेंसियां लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने कहती हैं।
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