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    UGC के 4 नियमों को लेकर टीचर्स और स्टूडेंट्स में क्यों है बवाल?

    UGC

    देशभर में UGC के नए नियमों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर पहले #UGCRollback ट्रेंड करने लगा, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और आलोचकों ने इन नियमों को भेदभाव बढ़ाने वाला बताया। इस बीच, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बदलावों का विरोध जताते हुए इस्तीफा दे दिया।

    इन घटनाओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि UGC ने आखिर कौन-से नए नियम लागू किए हैं और क्यों टीचर्स, स्टूडेंट्स और आम लोग इनके खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं।

    UGC का नया नियम क्या है?

    UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत, हर संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) बनाना अनिवार्य होगा। यह केंद्र भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगा।

    साथ ही, नए नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा बढ़ाई गई है। अब एससी/एसटी के साथ-साथ ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अगर नियमों का उल्लंघन होता है, तो UGC संस्थानों की सरकारी फंडिंग रोक सकता है और उनकी मान्यता रद्द कर सकता है।

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    इसके अलावा, शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। UGC ने भेदभाव के मामलों की जांच और निपटारे के लिए समय सीमा तय की है। इससे, मामलों में तेज़ और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

    यूजीसी के नियमों पर बड़े सवाल: जानें क्या है पूरा मामला

    1. यूजीसी ने कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए नए नियम क्यों बनाए?
    यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और कॉलेजों में 17 दिसंबर 2012 से जातीय भेदभाव रोकने के लिए सलाहकारी नियम लागू हैं। हालांकि, इन नियमों में कोई सख्त दंड का प्रावधान नहीं था। इसलिए, उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के लिए नए नियम लाने की जरूरत महसूस की गई।

    2. यूजीसी ने नए नियम क्यों लाए?
    जनवरी 2016 में तेलंगाना के रोहित वेमुला और मई 2019 में पायल ताडवी के आत्महत्या मामलों के बाद पीड़ित परिवारों ने 29 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें, जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर कड़े नियम बनाने की मांग की गई। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यूजीसी को निर्देश दिया कि वे जातिगत भेदभाव की शिकायतों का डेटा जुटाएं और नए नियम बनाएं। इसके बाद, फरवरी 2025 में ड्राफ्ट जारी किया गया।

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