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    अमेरिकी विशेषज्ञ ने मोदी की समझदारी और भारत का समर्थन किया।

    अमेरिकी अपील अदालत ने वॉशिंगटन डी.सी. में ट्रंप को रोकते हुए बाइडेन-नियुक्त एफटीसी कमिश्नर रेबेका स्लॉटर को पद पर बने रहने की अनुमति दी।उन्होंने कहा कि ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाकर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।प्राइस ने यह भी दावा किया कि ट्रंप निजी व्यापारिक हितों के कारण पाकिस्तान के साथ निकटता बना रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि ट्रंप को न तो अर्थशास्त्र की समझ है और न ही राष्ट्रीय हितों की चिंता।प्राइस ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच तनाव की कोई वजह नहीं है, लेकिन ट्रंप इसे बढ़ा रहे हैं।उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को “बेहद चतुर और समझदार नेता” बताते हुए कहा कि वे सोच-समझकर रणनीति अपना रहे हैं।

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    भारत, रूस और चीन पर प्राइस का दृष्टिकोण

    प्राइस ने रूस की घटती शक्ति और चीन के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से टिप्पणी की।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोवियत संघ जैसा प्रभाव लौटाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो रहे।उन्होंने स्पष्ट किया कि आज दुनिया में चीन का प्रभाव रूस की तुलना में कहीं अधिक बढ़ चुका है।प्राइस ने कहा कि भारत कभी भी स्थायी रूप से चीन के प्रभाव में नहीं जाएगा क्योंकि वह स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है।उन्होंने जोड़ा कि भारत अपनी ऐतिहासिक सभ्यता और स्वतंत्र नीति पर आधारित होकर विदेश संबंध तय करता है।प्राइस ने मोदी के चीन की सैन्य परेड में शामिल न होने को एक स्पष्ट संदेश करार दिया।उनके अनुसार, मोदी ने यह संकेत दिया कि भारत संतुलित नीति अपनाएगा लेकिन पूरी तरह चीन या रूस के साथ नहीं जाएगा।

    नवारो ने दावा किया था कि यूक्रेन युद्ध मोदी का युद्ध है, जिसे प्राइस ने हास्यास्पद बताया।प्राइस ने कहा कि यह मोदी का नहीं बल्कि पुतिन का युद्ध है और इसे सही संदर्भ में समझना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह गैर-जिम्मेदाराना बयान देना बेहद चौंकाने वाला है।प्राइस ने दोहराया कि अमेरिका के दीर्घकालिक हित भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने में निहित हैं।उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि वे नीति निर्माण कर रहे होते तो भारत पर कोई टैरिफ नहीं लगाते।प्राइस के अनुसार, ट्रंप की नीतियाँ न केवल आर्थिक रूप से ग़लत हैं बल्कि अमेरिका-भारत साझेदारी के लिए भी हानिकारक हैं।

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