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    रिटायरमेंट के बाद पूर्व CJI बी.आर. गवई के कदम की जमकर सराहना पेश की अनोखी मिसाल

    CJI

    पूर्व CJI बीआर गवई ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद जिम्मेदार कदम उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में निर्धारित सरकारी मर्सिडीज कार नए CJI सूर्यकांत के लिए छोड़ी। बीआर गवई ने स्वयं निजी वाहन में सादगी से वहां से रवाना होने का निर्णय लिया। इस कदम से उन्होंने न्यायपालिका में अनुकरणीय व्यवहार और आदर्श स्थापित किया। उनका उद्देश्य था कि नए CJI को तुरंत सरकारी सुविधा उपलब्ध हो और कोई बाधा न आए। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। उन्होंने नए दायित्वों को गंभीरता से स्वीकार करते हुए अपने कार्यकाल की शुरुआत की। सुनिश्चित किया गया कि आधिकारिक वाहन और अन्य संसाधन तुरंत उपलब्ध हो सकें। पूर्व CJI का सहयोग और शालीन व्यवहार समारोह को अनुकरणीय और व्यवस्थित बनाता है।

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    पूर्व CJI बी.आर. गवई ने नए CJI सूर्यकांत के लिए सरकारी कार छोड़कर पेश की मिसाल

    बीआर गवई ने संवैधानिक मर्यादा और सार्वजनिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दिखाया कि सरकारी संसाधनों का सुचारू हस्तांतरण नई परंपरा स्थापित करता है। उनका कदम न्यायपालिका के भीतर अनुशासन और सादगी का संदेश देता है। रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने व्यवस्था को व्यवस्थित रखने की प्राथमिकता दिखाई। इस व्यवहार से न्यायिक नैतिकता और सार्वजनिक विश्वास दोनों को मजबूती मिली। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग पंद्रह महीने तक CJI पद पर रहेगा। उन्होंने 30 अक्टूबर को औपचारिक रूप से प्रधान न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति प्राप्त की। नौ फरवरी 2027 को वह निर्धारित उम्र सीमा पूरी होने पर पद से रिटायर होंगे। अपने कार्यकाल में उन्होंने न्याय वितरण और सुधारों पर विशेष ध्यान देने का संकल्प लिया।

    साथ ही उन्होंने पारदर्शिता और न्यायिक सुधारों के माध्यम से विश्वास मजबूत करने का विचार रखा। सूर्यकांत का जन्म हरियाणा के हिसार जिले में एक सामान्य परिवार में हुआ। उन्होंने कानून में स्नातकोत्तर में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया। वह छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे। अपने अनुभव और मेहनत से उन्होंने न्यायपालिका में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी यात्रा युवा वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

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