मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 114 दर्ज किए जाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बढ़ते वायु प्रदूषण को गंभीर बताते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने विशेष रूप से निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, सड़कों की खराब सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन में खामियों और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर चिंता जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि AQI 114 भले ही “मध्यम” श्रेणी में आता हो, लेकिन यह नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की चेतावनी है।
वायु प्रदूषण बढ़ा, मुंबई हाई कोर्ट ने BMC कमिश्नर को पेश होने का आदेश दिया
अदालत ने BMC से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या ठोस कार्ययोजना बनाई गई है। हाई कोर्ट ने नगर आयुक्त को अगली सुनवाई में सभी संबंधित विभागों की रिपोर्ट के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदूषण से सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ता है, इसलिए प्रशासन को केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने होंगे। इस मामले में हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो और सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और बीएमसी को चेताया कि प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाए और नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न किया जाए।


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