नरेंद्र मोदी बुधवार से ड्रोन सहयोग समेत मुद्दों पर चर्चा के लिए इसराइल की दो दिन की यात्रा शुरू करेंगे और 25-26 फ़रवरी तक वहीं रहेंगे। इस बीच, बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने कैबिनेट बैठक में इस दौरे पर चर्चा की। इसके जवाब में मोदी ने कहा कि वह दोनों देशों के संबंधों पर सहमत हैं और भारत भरोसे, नवाचार, शांति और विकास पर आधारित इस दोस्ती को बहुत महत्व देता है।।
साथ ही, फ़ोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता होने वाला है, जिसके तहत भारत स्पाइस-1000 प्रिसीजन गाइडेड बम, रैपेंज एयर-टू-सरफेस मिसाइल, एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल और आइस ब्रेकर मिसाइल सिस्टम खरीदेगा।
आधुनिक जंग में ड्रोन क्यों निभा रहा बड़ी भूमिका
पिछले वर्षों में युद्ध का तरीका बदला है। ड्रोन ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। रूस-यूक्रेन युद्ध में सेनाओं ने इनका खूब इस्तेमाल किया। अन्य संघर्षों में भी यही रुझान दिखा।वी.के. सक्सेना कहते हैं, ये तकनीक अब अहम हथियार बन चुकी है। पारंपरिक रडार अक्सर इन्हें पकड़ नहीं पाते। ये सटीक निशाना लगाते हैं। साथ ही निगरानी और टारगेट पहचान में मदद करते हैं।
वे स्पष्ट करते हैं कि यह वायुसेना की जगह नहीं लेती। फिर भी ज़मीन पर दुश्मन बलों पर असर डालती है। कम लागत के कारण छोटे समूह भी इसे अपना रहे हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
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ड्रोन ने युद्ध का चेहरा कैसे बदला
रूस और यूक्रेन में फ़रवरी 2022 में युद्ध शुरू हुआ। यूक्रेन छोटा देश है। उसकी सैन्य ताक़त भी कम है। फिर भी लड़ाई जारी है। चार साल बाद भी नतीजा नहीं निकला। विशेषज्ञ ड्रोन को बड़ी वजह मानते हैं। ड्रोन भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नष्ट होने पर लागत कम रहती है
अशोक कुमार कहते हैं, ड्रोन ने बड़ी भूमिका निभाई। दोनों देशों ने इनका इस्तेमाल किया। यूक्रेन को नाटो देशों से ड्रोन मिले। अब वह खुद भी निवेश बढ़ा रहा है। वह आर्मीनिया और अज़रबैजान युद्ध का उदाहरण देते हैं। उनका कहना है, ड्रोन युद्ध बदल रहे हैं। पहले अज़रबैजान हारा था। बाद में उसे तुर्की से ड्रोन मिले। फिर उसने बढ़त बना ली।

