यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने यूजीसी के नए विनियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और स्पष्ट किया है कि फिलहाल 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि देश को जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या फिर उल्टी दिशा में जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए यूजीसी नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। साथ ही यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर एक विशेष समिति का गठन किया जा सकता है और नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत है।
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नए नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका: सुप्रीम कोर्ट
दरअसल, यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था। इसके बाद देशभर में इन नियमों को लेकर विरोध शुरू हो गया। कई याचिकाकर्ताओं ने इन विनियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान व यूजीसी एक्ट, 1956 के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन के खिलाफ ये याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की है और तब तक नए नियमों पर रोक बरकरार रहेगी।
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