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    TVK

    तमिलनाडु 2026 विधानसभा चुनाव में विजय की TVK ने द्रविड़ राजनीति के लंबे इतिहास को नए रूप में पेश करते हुए बड़ा प्रभाव दिखाया है। यह विचारधारा मूल रूप से पेरियार के सामाजिक न्याय सिद्धांतों से जुड़ी रही है, जिसे म. करुणानिधि ने आगे बढ़ाया था। अब टीवीके उसी विरासत को आधुनिक राजनीतिक रूप में प्रस्तुत कर रही है और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसने सीधे तौर पर डीएमके के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। करीब सत्तर सीटों पर टीवीके के कारण डीएमके को नुकसान होता दिख रहा है, जो एआईएडीएमके और बीजेपी गठबंधन से भी अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है।

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    TVK का अप्रत्याशित उदय और चुनावी प्रदर्शन

    टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए शुरुआती रुझानों में 100 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल की है, जबकि डीएमके लगभग 60 सीटों तक संघर्ष करती नजर आई। एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन भी लगभग 65 सीटों पर आगे दिखा, जिससे तमिलनाडु की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया। पोल रणनीतिकार प्रशांत किशोर और अन्य एजेंसियों ने पहले ही टीवीके की मजबूत उपस्थिति का अनुमान लगाया था, जिसे शुरुआत में लोग अतिशयोक्ति मान रहे थे, लेकिन अब वे आंकड़े काफी हद तक सही साबित हो रहे हैं।

    यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टीवीके ने डीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सीधी सेंध लगाई है, खासकर शहरी युवाओं के बीच जहां चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै जैसे शहरों में समर्थन तेजी से बढ़ा है। डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार, रोजगार संकट और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर असंतोष भी सामने आया, जिसे टीवीके ने अपने चुनावी अभियान में मजबूती से उठाया। विजय की रैलियों में भारी भीड़ और युवा मतदाताओं की भागीदारी ने इस लहर को और मजबूत किया।

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    डीएमके के वोट बैंक में सीधी सेंध और नया राजनीतिक समीकरण

    टीवीके ने सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़कर किसी भी गठबंधन से दूरी बनाए रखी, जिससे इसे एक स्वतंत्र विकल्प के रूप में देखा गया। विजय ने पार्टी को द्रविड़ सामाजिक न्याय और तमिल पहचान के सिद्धांतों पर आधारित बताया और डीएमके को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी तथा बीजेपी को वैचारिक विरोधी के रूप में पेश किया। इस स्पष्ट राजनीतिक रुख ने पार्टी की छवि को मजबूत किया और मतदाताओं के बीच एक नई उम्मीद पैदा की।

    कुल मिलाकर टीवीके का उदय तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जहां लंबे समय से चले आ रहे डीएमके और एआईएडीएमके के वर्चस्व को चुनौती मिली है। विजय की लोकप्रियता और फिल्मी छवि ने पार्टी को तेजी से जनाधार दिया है और इसे डीएमके के लिए सबसे बड़ा चुनावी झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजर अंतिम परिणामों और आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई है।

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