Narak Chaturdashi, जिसे अलग-अलग इलाकों में छोटी दिवाली, रूप चौदस या छोटी दीपावली भी कहा जाता है, दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन यम दीप जलाने की परंपरा है, जो कुछ परिवार धनतेरस की रात को भी निभाते हैं, जबकि कई लोग इसे दिवाली से एक दिन पहले जलाते हैं। इसलिए आप अपने घर की परंपरा के अनुसार यम दीपक जला सकते हैं। अगर आपके यहां धनतेरस को यह रिवाज है तो 18 अक्टूबर की रात इसे जलाना सही होगा, और यदि आप दिवाली से एक दिन पहले जलाते हैं तो 19 अक्टूबर की शाम को यम दीप जलाना शुभ माना जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी की रात यमराज को समर्पित यम दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यम दीपक हमेशा चौमुखी होना चाहिए, जिसमें चार बातियां लगी हों, ताकि यह चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाए। ऐसा दीपक जलाने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और घर के सभी सदस्यों को दुर्घटना और असमय मृत्यु से सुरक्षा मिलती है। इसलिए यम दीपक जलाते समय सही दिशा और नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है।
सही दिशा और विधि से यम दीप जलाना जरूरी
शास्त्रों के अनुसार यम दीपक हमेशा यमराज की दिशा मानी जाने वाली दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए। मिट्टी या आटे का बना दीपक और सरसों के तेल से जलाना शुभ माना जाता है। नरक चतुर्दशी पर यम दीपक के साथ 14 अन्य दीपक भी घर के पूजाघर, रसोई, तुलसी, मुख्य द्वार, पानी के स्थान, छत और बाथरूम जैसे विभिन्न हिस्सों में जलाए जाते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाते हैं। यम दीप जलाने के बाद उसे पूरे घर में घुमाकर दक्षिण दिशा में साफ-सुथरे स्थान पर रखना चाहिए ताकि यमराज की कृपा और परिवार की सुरक्षा बनी रहे।
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