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    नक्सलवाद को बड़ा झटका: नागपुरे सहित 11 कुख्यात नक्सली हुए आत्मसमर्पण

    नक्सलवाद

    नक्सलवाद को एक बड़ा झटका लगा है, जब विकास नागपुरे सहित 11 कुख्यात नक्सली सरेंडर हुए। CPI (माओवादी) के स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य विकास नागपुरे ने अपने साथियों के साथ गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इन नक्सलियों पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वे कई जिलों में सक्रिय थे। सरेंडर महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाके में चल रहे सुरक्षा अभियानों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी मिली। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में DVCM कमांडर नागासु गोलू वड्डे, रानो पोरेती और संतु पोरेती शामिल हैं। संगीता पंधारे, प्रताप बंटुला, अनुजा कारा, पूजा मुडियम, दिनेश सोत्ती, शीला मड़ावी और अर्जुन डोडी भी इसमें शामिल थे।

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    विकास नागपुरे सहित 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

    DIG गढ़चिरौली अंकित गोयल ने बताया कि MMC जोन प्रवक्ता ने पहले ही सरेंडर की इच्छा जताई। प्रवक्ता ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दो पत्र लिखकर प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया था। इससे नक्सलियों और पुलिस के बीच सक्रिय संवाद और समन्वय से आत्मसमर्पण सफल हुआ। सरेंडर किए गए नक्सली कई जिलों में हिंसा, उगाही और भर्ती के नेटवर्क में सक्रिय रहे। उनकी इस कार्रवाई से नक्सल आंदोलन का नेटवर्क कमजोर हुआ और सुरक्षा बलों को सफलता मिली। DIG ने कहा कि यह कार्रवाई आउटरीच प्रोग्राम और समन्वित पुलिसिंग की सफलता को स्पष्ट दिखाती है। नक्सलियों ने सात हथियार पुलिस को सौंपे और मुख्यधारा में आने के लिए तैयार दिखाई दिए। सरेंडर से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई और स्थानीय लोगों का भरोसा बढ़ा। DIG ने बताया कि यह आत्मसमर्पण नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने और समाज में शामिल करता है।

    सरेंडर का यह कदम माओवादी समूह में डर और असंतोष को भी उजागर करता प्रतीत हुआ। आत्मसमर्पण ने पुलिस और प्रशासन की योजनाओं और सुरक्षा अभियानों की प्रभावशीलता साबित की। सरेंडर प्रक्रिया ने हिंसा और उगाही के पुराने नेटवर्क को काफी हद तक कमजोर किया। नक्सलियों के आत्मसमर्पण से क्षेत्रीय सुरक्षा, कानून और प्रशासनिक कामकाज में सुधार हुआ। विकास नागपुरे और उनके 11 साथियों का यह आत्मसमर्पण पिछले कुछ महीनों में सबसे बड़ा माना। इन नक्सलियों ने हथियार और सामग्री पुलिस को सौंपकर सुरक्षा सुनिश्चित की और सहयोग दिखाया। सरेंडर ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की सरकारी नीतियों की सफलता को प्रमाणित किया। DIG ने बताया कि यह कदम भविष्य में और नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर सकता है। यह घटना नक्सल आंदोलन और हिंसा के नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

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