अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के बीच हिंद महासागर में एक बड़ी घटना सामने आई है। श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इस घटना ने भारत की समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और दक्षिण एशिया की राजनीति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ रहा तनाव अब हिंद महासागर तक पहुंच गया है, जो भारत के लिए बेहद रणनीतिक इलाका माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय हुई जब ईरानी युद्धपोत भारत में आयोजित एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था। इस जहाज ने 18 से 25 फरवरी के बीच बंगाल की खाड़ी में हुए मिलन इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लिया था, जिसके लिए इसे भारतीय नेवी ने आमंत्रित किया था। विशाखापत्तनम से लौटते समय इंटरनेशनल वाटर्स में अमेरिकी सबमरीन ने इस जहाज पर हमला कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब अमेरिका ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन जहाज को डुबोया है।
हमले में जहाज पर सवार लगभग 80 लोगों की मौत होने की आशंका जताई गई है। वहीं श्रीलंकाई नेवी ने करीब 30 नाविकों को बचा लिया है। उन्हें गाले के करापिटिया हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है और अभी भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यह कार्रवाई समुद्री कानून यूएनसीएलओएस के प्रावधानों के तहत की जा रही है, जिसके अनुसार समुद्र में संकट में फंसे जहाजों की मदद करना हर तटीय देश की जिम्मेदारी होती है।
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यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि हिंद महासागर में अमेरिकी नेवी की मजबूत मौजूदगी है। यह इलाका अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के दायरे में आता है, जिसका मुख्यालय बहरीन में है। यहां अक्सर वॉरशिप, डेस्ट्रॉयर और न्यूक्लियर सबमरीन तैनात रहती हैं। टॉरपीडो हमले के कारण जहाज का निचला हिस्सा पूरी तरह टूट गया, इसलिए बचाव दल को समुद्र में केवल तेल का धब्बा दिखाई दिया और जहाज का कोई बड़ा हिस्सा नहीं मिला।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह उसके रणनीतिक समुद्री क्षेत्र के काफी करीब हुई है। पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा कि भारत को अमेरिका को बताना चाहिए कि उसने समुद्री युद्ध भारत के दरवाजे तक पहुंचा दिया है। वहीं रणनीतिक विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने भी सवाल उठाया कि यदि अमेरिका ने साझा समुद्री डेटा का इस्तेमाल करके ईरानी जहाज को निशाना बनाया हो तो इससे भारत और अमेरिका के रक्षा सहयोग पर असर पड़ सकता है। इसी बीच पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते का हवाला देने के बाद आशंका जताई जा रही है कि यह संघर्ष पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर दक्षिण एशिया तक फैल सकता है।
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