65 वर्षीय पुनिया बाई साहू ने ईसाई धर्म अपनाया और उन्होंने कभी नहीं सोचा कि विवाद उनके निधन के बाद होगा। उनके निधन के बाद ग्रामीणों और संगठनों ने अंतिम संस्कार को रोक दिया और उनका शव तीन दिन तक भटकता रहा। उनके परिजनों ने हिंदू धर्म अपनाया और प्रशासन के सामने माफी मांगकर उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया। उनके परिजनों ने लिखित रूप में प्रशासन और समाज को भरोसा दिलाया कि भविष्य में वे ईसाई धर्म से जुड़े नहीं रहेंगे। धमतरी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि साहू समाज और परिवार के विवाद ने अंतिम संस्कार को रोक दिया।
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प्रशासन और परिवार की भूमिका
समाज ने विवाद को सुलझाने के लिए बैठक आयोजित की और सामाजिक रूप से इसे हल किया। पुनिया बाई साहू ने दो साल पहले ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन उनके अंतिम संस्कार पर ग्रामीणों और संगठनों ने विरोध किया। ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया क्योंकि महिला ने ईसाई धर्म अपनाया था और वे इसे स्वीकार नहीं कर रहे थे।
परिवार ने शव तहसील मुख्यालय ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वहाँ भीड़ ने उनका विरोध किया और अंतिम संस्कार प्रक्रिया रोकी। भीड़ ने दफ़नाने की जगह भर दी और अंतिम संस्कार को बाधित कर दिया। 25 दिसंबर की रात, परिवार का ‘शुद्धिकरण’ किया गया और प्रशासन ने लिखित सहमति ली। अगले दिन, परिवार ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार महिला का अंतिम संस्कार संपन्न किया। परिवार ने शपथ पत्र देकर कहा कि वे अब ईसाई धर्म या प्रचारक से नहीं जुड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में धर्म परिवर्तन होने पर वे गाँव छोड़ देंगे। पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ में ईसाई अंतिम संस्कार को लेकर लगातार विवाद और हिंसा हुई। बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक और सामाजिक टकराव के कारण हिंसक घटनाएँ बढ़ीं।

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